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हमास ने 28 शवों को वापस करने का किया था वादा, लौटाए सिर्फ 4 बंधकों के शव : इजरायल

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

येरुशुलम. गाजा में बंद सभी 20 जीवित बंधक और इजरायल में बंद सैकड़ों फिलिस्तीनी कैदी सोमवार को रिहा कर दिए गए. यह उस युद्धविराम समझौते का हिस्‍सा था जो हाल ही में हमास और इजरायल के बीच साइन हुआ है. हालांकि इस समझौते के साथ ही अब हमास पर नए आरोप लगने लगे हैं. दो साल तक चला युद्ध, जिसमें गाजा पट्टी बुरी तरह तबाह हो गई, अब जाकर शांत हुआ है.

इजरायल ने रिहा किए सभी फिलिस्‍तीनी

सोमवार को जहां इजरायल ने इस बात की पुष्टि की कि उसने 1900 से ज्‍यादा फिलिस्‍तीनी कैदियों को रिहा कर दिया है तो वहीं हमास ने कहा कि वह 28 मृत इजरायली बंधकों में से चार शव लौटाएगा. हमास ने ये शव लौटा भी दिए हैं. वहीं इजरायल के होस्‍टेजेस एंड मिसिंग फैमिली फोरम ने इसे हमास के साथ युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन बताया है. चार शवों की पहचान के बारे में अभी कोई घोषणा नहीं हुई है.

इससे पहले इजरायली अधिकारियों की ओर से यह भी पुष्टि नहीं की जा सकी थी कि आज कितने शव मिलने की संभावना है. कुछ मृत बंधकों के परिवारों को इजरायली अधिकारियों ने रविवार को बताया था कि उनके प्रियजनों के शव आज या कल लौटाए नहीं जाएंगे, लेकिन इजरायल उन्हें खोजकर लौटाने के लिए हर संभव प्रयास करेगाऋ हालांकि, कई सूत्रों ने संकेत दिया था कि अधिकांश मृत बंधक आज या जल्द ही लौटाए जाएंगे.

हमास ने किया था आगाह

इससे पहले हमास ने चेताया था कि कुछ शवों को ढूंढ़ने में उसे मुश्किलें आएंगी. फोरम की तरफ से कहा गया, ‘यह हमास की तरफ से समझौते का घोर उल्लंघन है. हम उम्मीद करते हैं कि इजरायल सरकार और मध्यस्थ इस अन्याय को खत्‍म करेंगे. फोरम की तरफ से कहा गया है कि वो ‘स्तब्ध और निराश’ है. फोरम के मुताबिक मृत बंधकों के परिवार गहरे दुःख से भरे कठिन दिनों का सामना कर रहे हैं.

कुल कितने थे बंधक

फोरम के अनुसार वह एक भी बंधक को नहीं छोड़ेगा. उसने इसके साथ ही कहा है कि समझौते की शर्तों को लागू करना ही होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमास इस उल्लंघन की कीमत चुकाए. हमास ने 7 अक्‍टूबर 2023 को दक्षिणी इजरायल पर किए हमले में 251 लोगों को बंधक बना लिया था. 20 जिंदा बचे बंधक अपने परिवार के पास लौट गए हैं. हमास ने मध्यस्थों को बताया है कि उसे बाकी 24 में से कुछ के स्थान के बारे में पता नहीं है. जबकि दो बंधक लापता हैं.

साभार : एनडीटीवी  

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।