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इंजरी के बाद वापसी करना कभी आसान नहीं होता: ऋषभ पंत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. टीम इंडिया के विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत इंग्लैंड के खिलाफ मैनचेस्टर में खेले गए सीरीज के चौथे टेस्ट में इंजर्ड होने की वजह से लगभग 4 महीने से इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर थे. साउथ अफ्रीका के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों की टेस्ट सीरीज से ऋषभ पंत फिर से भारतीय टीम में वापसी कर रहे हैं. वापसी पर युवा विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत बेहद खुश नजर आए और इसके लिए उन्होंने ईश्वर को धन्यवाद दिया.

ऋषभ पंत ने भावुक होकर खोल दिए राज

BCCI द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में ऋषभ पंत ने कहा, ‘इंजरी के बाद वापसी करना कभी आसान नहीं होता. लेकिन, ईश्वर हमेशा मेरे प्रति दयालु रहे हैं और उन्होंने मुझे हमेशा आशीर्वाद दिया है. इसके लिए मैं हमेशा ईश्वर का आभारी होने की कोशिश करता हूं. जब भी मैं मैदान पर उतरता हूं, हमेशा ऊपर देखता हूं और ईश्वर, अपने माता-पिता, अपने परिवार, सभी का शुक्रिया अदा करता हूं.’

किस्मत पर आप कंट्रोल नहीं कर सकते

ऋषभ पंत ने कहा, ‘जो कंट्रोल में है, मैं उस पर ध्यान केंद्रित करता हूं. किस्मत पर आप कंट्रोल नहीं कर सकते. इसलिए, मैं इसके बारे में सोचने की कोशिश नहीं करता, क्योंकि ऐसे बहुत से फैक्टर हैं जिन पर हम ध्यान नहीं देते, लेकिन अगर आप अपना ध्यान ऐसी जगह पर रख सकें जहां बहुत सी चीजें आपको प्रभावित न कर रही हों, और आप केवल उन चीजों पर ध्यान केंद्रित करें जो आपके लिए मायने रखती हैं. अगर आप ऐसे काम करते रहें जिनसे आपको अच्छा महसूस हो, खासकर जब आप चोटिल हों, तो आपको खुशी मिलेगी.’

पंत की फॉर्म और फिटनेस शानदार

विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने कहा, ‘हमें विपरीत परिस्थितियों में भी अनुशासित और सहज रहते हुए कड़ी मेहनत करनी चाहिए और हमेशा सीखने के लिए तैयार रहना चाहिए और जो काम कर रहे हैं उसे करते हुए हर पल का आनंद लेना चाहिए.’ ऋषभ पंत ने इंजरी के बाद दक्षिण अफ्रीका ए के खिलाफ 4 दिवसीय मैचों की सीरीज से क्रिकेट में वापसी की. बेंगलुरु में खेले गए मुकाबलों में पंत की फॉर्म और फिटनेस शानदार रही.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।