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लियोनेल मेसी के कार्यक्रम में हुए कुप्रबंधन के कारण पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने दिया इस्तीफा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलकाता. पश्चिम बंगाल के खेल मंत्री अरूप बिस्वास ने इस्तीफा देने की इच्छा जताई, जिसे सीएम ममता बनर्जी ने स्वीकार कर लिया है। बता दें कि इससे पहले फेमस फुटबॉलर लियोनल मेसी के कार्यक्रम में हुए बवाल के बाद आलोचनाओं का सामना कर रहे खेल मंत्री ने अपने पद से इस्तीफा देने की इच्छा जताई थी। टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने मंत्री के एक पत्र को सार्वजनिक किया था। टीएमसी नेता कुणाल घोष के अनुसार, अरूप बिस्वास ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर खेल विभाग की जिम्मेदारियों से मुक्त होने का अनुरोध किया।

DGP समेत कई पुलिस अधिकारियों को नोटिस

वहीं, लियोनेल मेस्सी इवेंट में अफरा-तफरी और तोड़फोड़ के मामले में पश्चिम बंगाल सरकार ने DGP राजीव कुमार, बिधाननगर के CP मुकेश कुमार, युवा मामले और खेल विभाग के प्रधान सचिव राजेश कुमार सिन्हा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इवेंट के दिन अपनी ड्यूटी और जिम्मेदारियों में कथित लापरवाही के लिए DCP अनीश सरकार (IPS) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। इस मामले की पूरी जांच के लिए IPS अधिकारियों पीयूष पांडे, जावेद शमीम, सुप्रतिम सरकार और मुरलीधर की एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम बनाई गई है।

भाजपा-टीएमसी के बीच आरोप-प्रत्यारोप

पश्चिम बंगाल में पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक माहौल के बीच यह ताजा घटना सामने आई है। अर्जेंटीना के फुटबॉल दिग्गज लियोनेल मेसी के बहुचर्चित दौरे के दौरान कोलकाता स्टेडियम में फुटबॉल प्रशंसकों द्वारा तोड़फोड़ किए जाने के बाद तनाव बढ़ गया था। खबरों के मुताबिक, मेसी ने कथित तौर पर कुप्रबंधन के कारण मैदान पर केवल 10 मिनट बिताने के बाद स्टेडियम छोड़ दिया, जिससे टिकट के लिए भारी रकम चुकाने वाले कई प्रशंसक नाराज और निराश हो गए।

टीएमसी पर विपक्ष हमलावर

इस घटना के बाद, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने माफी मांगी और कहा कि वह तोड़फोड़ से “बेहद दुखी और स्तब्ध” हैं। हालांकि, भाजपा ने उन पर “मगरमच्छ के आंसू बहाने” का आरोप लगाया और इस घटना को पश्चिम बंगाल और फुटबॉल दोनों का “अपमान” बताया। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने इस अराजकता के लिए तृणमूल कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, सत्ताधारी पार्टी ने इस घटना से खुद को अलग करते हुए कहा कि यह आयोजन एक निजी एजेंसी द्वारा आयोजित किया गया था, न कि राज्य सरकार द्वारा।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।