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श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी नीरेका अमरसूर्या का नीति आयोग दौरा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नीति आयोग ने 16 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में श्रीलंका की प्रधानमंत्री डॉ. हरिनी नीरेका अमरसूर्या की मेजबानी की। यह यात्रा, दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने और बुनियादी ढांचा, शिक्षा, पर्यटन, कौशल विकास तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्रों में भारत की परिवर्तनकारी पहलों पर विचार साझा करने पर केंद्रित था।

श्रीलंका की प्रधानमंत्री ने अपने उद्घाटन भाषण में थिंक टैंक और समन्वय मंच के रूप में नीति आयोग की भूमिका की सराहना की और दीर्घकालिक नीति निर्माण को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के साथ जोड़ने की इसकी अद्वितीय क्षमता का उल्लेख किया। नीति आयोग केंद्रीय मंत्रालयों और राज्यों के साथ मिलकर कैसे कार्य करता है, विश्लेषण, साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण और नागरिकों से प्राप्त प्रतिक्रिया को प्रभावी शासन से कैसे जोड़ता है, उन्होंने यह भी समझने की कोशिश की। श्रीलंका की सुधार यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने ऐसे संस्थानों की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला जो नीतिगत सुसंगतता, साक्ष्य-आधारित निर्णयों और राजनीतिक चक्रों से परे निरंतरता को बढ़ावा देते हैं।

नीति आयोग के सदस्यों की उपस्थिति में आयोग के उपाध्यक्ष श्री सुमन के. बेरी द्वारा संचालित चर्चा में देश में चल रही मल्टीमॉडल अवसंरचना नियोजन के लिए पीएम गति शक्ति, समग्र और समावेशी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पर्यटन एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान में सहयोगात्मक अवसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा डिजिटल शासन सहित अग्रणी प्रौद्योगिकियों का अवलोकन प्रदान किया गया।

कार्यक्रम में व्यापार, निवेश एवं आर्थिक और प्रौद्योगिकी सहयोग समझौते (ईटीसीए) सहित भारत-श्रीलंका द्विपक्षीय संबंधों पर प्रस्तुतियां दी गईं। इसके अलावा पीएम गति शक्ति, शिक्षा सुधार, समग्र, समावेशी और प्रौद्योगिकी-संचालित शिक्षण प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनाई गई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान, जन-जन के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए विरासत, पर्यावरण और कल्याण पर्यटन में सहयोग तथा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल नवाचार और शासन में सहयोग पर भी प्रस्तुतियां दी गईं।

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बैठक में नीति आयोग के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जो ज्ञान-साझाकरण और सहयोगात्मक सहभागिता के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

इस यात्रा ने भारत और श्रीलंका के रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करने, सतत विकास को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय चुनौतियों व अवसरों का समाधान करने के लिए नवाचार एवं कौशल का लाभ उठाने के साझा दृष्टिकोण को रेखांकित किया। दोनों पक्षों ने ‘पड़ोस प्रथम’ की नीति और ‘महासागर’ ढांचों के अंतर्गत ज्ञान-आधारित, प्रौद्योगिकी-संचालित और जन-केंद्रित साझेदारी को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। 

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।