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ब्रिटेन ने अपने नागरिकों को वापस लेने से मना करने वाले देशों पर वीज़ा प्रतिबंध लगा दिया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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लंदन. ब्रिटेन की अपनी वीजा नीतियों को लेकर कड़ा रुख दिखाया है। नीति में बड़ा बदलाव करते हुए प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और गृह मंत्री शबाना महमूद ने संसद में नए, कड़े नियम पेश किए हैं। संसद में नियमों को पेश करने के बाद शबाना महमूद ने कहा है कि जब तक देश अपने अपराधियों और अवैध प्रवासियों की वापसी स्वीकार नहीं करते, उन पर ट्रंप शैली के वीजा प्रतिबंध लगाए जाएंगे। उन्होंने अवैध आव्रजन से निपटने के लिए और व्यापक सुधारों का भी ऐलान किया है।

प्रतिबंध का सामना करने वाले ये हैं पहले देश

ब्रिटेन की ओर से इस तरह के प्रतिबंध का सामना करने वाले पहले देश अंगोला, नामीबिया और कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य हैं, जिनके नागरिकों को तब तक ब्रिटिश वीजा नहीं दिया जाएगा जब तक कि उनकी सरकारें निष्कासन पर सहयोग में तेजी से सुधार नहीं करती हैं। गृह मंत्रालय ने कहा, “इन देशों को उनके अस्वीकार्य रूप से कम सहयोग और बाधा उत्पन्न करने वाली वापसी प्रक्रियाओं के लिए दंड का सामना करना पड़ रहा है। इन देशों के हजारों अवैध प्रवासी और अपराधी वर्तमान में ब्रिटेन में हैं।”

मानवाधिकार कानूनों में होगा बदलाव

असहयोग में दूतावासों की ओर से निष्कासन संबंधी कागजी कार्रवाई समय पर ना करना और व्यक्तियों से अपने दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाना शामिल है। टाइम्स (यूके) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत उन कई अन्य देशों में से एक माना जाता है जो अवैध प्रवासियों को वापस लेने के प्रति सबसे अधिक प्रतिरोधी हैं और आने वाले वर्ष में इस सूची में शामिल हो सकते हैं। निर्वासन को बढ़ाने और प्रवासियों को “व्यवस्था के साथ खिलवाड़” करने से रोकने के लिए मानवाधिकार कानूनों में भी बदलाव किया जाएगा।

तो छोड़ना होगा देश

ब्रिटेन की सरकार अनुच्छेद 8 (परिवार और निजी जीवन का अधिकार) की अदालतों द्वारा व्याख्या करने के तरीके में सुधार के लिए कानून बनाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पारिवारिक संबंध का अर्थ निकट परिवार, जैसे माता-पिता या बच्चे, से है – जिससे लोगों को ब्रिटेन में रहने के लिए संदिग्ध संबंधों का उपयोग करने से रोका जा सके। प्रवासियों को एक ही अपील में सभी कानूनी आधारों पर बहस करने की अनुमति होगी और अगर वो हार जाते हैं, तो उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर किया जाएगा।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।