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प्रशांत किशोर ने बीपीएससी परीक्षा दुबारा कराने की मांग का समर्थन करने पर की चिराग पासवान की तारीफ

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा को दोबारा कराने की मांग का केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी समर्थन किया है. जिसको लेकर जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा कि चिराग पासवान ने प्रशांत किशोर का सपोर्ट किया ये महत्वपूर्ण नहीं है. चिराग पासवान ने बिहार के बच्चों का सपोर्ट किया है इसके लिए उनका स्वागत किया जाना चाहिए. मैं हमेशा कहता हूं वे सुलझे हुए व्यक्ति और नेता हैं, मेरे मित्र हैं. थोड़े देर से सही पर उन्होंने बोला है तो चिराग का स्वागत कर रहे हैं.

‘बीजेपी और JDU के नेता इसका जवाब दें’

प्रशांत किशोर ने आगे कहा कि एनडीए के घटक दलों से सवाल किया जाना चाहिए कि अभी तक विपक्ष बोल रहा था लेकिन अब भारत सरकार में मंत्री और आपके सहयोगी दल के नेता बोल रहे हैं कि BPSC परीक्षा में धांधली हुई है और री-एग्जाम होना चाहिए. अब बीजेपी और JDU के नेता इसका जवाब दें. मुझे मालूम है कि वो जवाब नहीं देंगे, लेकिन न्यायालय ने कह दिया है शो कॉज हो गया है 31 जनवरी से पहले-पहले जवाब तो देना ही पड़ेगा.

‘अन्याय के खिलाफ लड़ाई को जारी रखा जाएगा’

जन सुराज पार्टी संस्थापक ने कहा कि बच्चों के साथ अन्याय हुआ है. हर वो प्रयास किया जाएगा कि अन्याय के खिलाफ लड़ाई को जारी रखा जाए. अब सिर्फ बीपीएससी अभ्यर्थियों का मामला नहीं रह गया है अब ये मामला बिहार के हर उस युवा का है जिसके साथ पिछले कई वर्षों से अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं में अन्याय होता रहा है, पेपर लीक होता रहा है. अब ये हर उस युवा का मामला है जो नौकरी की आशा में तैयारी करता है और उसकी नौकरी को भ्रष्टाचार की भेट चढ़ा दिया जाता है बेच दिया जाता है. उन्होंने कहा कि अब हर परिवार में ये चर्चा है का विषय है कि बिहार में भ्रष्टाचार हो रहा है. ये हर उस महिला का मामला बन गया है जिसने देखा है कि उसके बच्चों को ठंड में पानी से भिगाकर दौड़ा-दौड़ाकर मारा गया है. अब ये राज्यभर का मामला है जिसे सरकार दबा नहीं पाएगी.

साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।