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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने सनातनियों से दूर रहने की दी सलाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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बेंगलुरु. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने RSS और सनातनियों पर तीखा हमला बोला है, लोगों से उनकी संगत से बचने और डॉ. अंबेडकर के संविधान व प्रगतिशील विचारों को अपनाने की बात कही है. उन्होंने RSS पर अंबेडकर का विरोध करने और अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया इन दिनों अपने बयानों को लेकर खासे चर्चा में बने हुए हैं. इन बयानों में वे आरएसएस पर जमकर हमला बोल रहे हैं. शनिवार को उन्होंने कहा कि लोगों को सनातनियों की संगत से बचना चाहिए और RSS से सावधान रहना चाहिए. क्योंकि उन्होंने इतिहास में हमेशा डॉ. भीमराव अंबेडकर और उनके बनाए संविधान का विरोध किया है.

सिद्धारमैया ने लोगों से प्रगतिशील और तर्कसंगत ताकतों के साथ जुड़ने की अपील की है. शिक्षा के महत्व पर जोर दिया और अंधविश्वासों को त्यागने की बात कही है. उन्होंने कहा कि ऐसा करने से समाज सही दिशा में आगे बढ़ सकेगा. सिद्धारमैया ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने दुनिया के कई देशों के संविधान पढ़े और उनमें से भारत के लिए सबसे अच्छा संविधान बनाया है. सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि हमें और लगभग हर किसी को अपनी संगति सही रखनी चाहिए. समाज के भले के लिए काम करने वालों के साथ रहिए, न कि उन सनातनियों के साथ जो सामाजिक बदलाव का विरोध करते हैं.

कट्टरपंथी सोच समाज में मौजूद

मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई पर जूता फेंके जाने की घटना का भी ज़िक्र किया और इसे गहरी जड़ें जमाए रूढ़िवादिता का प्रतीक बताया है. उन्होंने कहा, “एक ‘सनातनी’ द्वारा मुख्य न्यायाधीश पर जूता फेंकना यह दर्शाता है कि समाज में अभी भी ‘सनातनी’ और रूढ़िवादी तत्व मौजूद हैं. इस घटना की सिर्फ दलितों को नहीं बल्कि हर भारतीय को निंदा करनी चाहिए. तभी कहा जा सकता है कि समाज बदलाव के रास्ते पर है.

अंधविश्वास को त्याग दें- सीएम

सिद्धारमैया ने कहा कि उन्हें बुद्ध, बसव और अंबेडकर के विचारों से प्रेरणा मिलती है, और उन्होंने कहा कि सामाजिक प्रगति का मार्गदर्शन तार्किकता को करना चाहिए. उन्होंने कहा, “इसलिए मुझे उम्मीद है कि तार्किकता और वैज्ञानिक सोच बढ़ेगी. ऐसा व्यक्ति न बनें जो विज्ञान का अध्ययन तो करता है, लेकिन फिर भी अंधविश्वासों का पालन करता है.”

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साभार : टीवी9 भारतवर्ष

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।