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पेरिस से नेपोलियन-युग के गहनों की चोरी के बाद बंद किया गया लौवर संग्रहालय

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पेरिस. बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक की आपने ऐसी कई फिल्में देखी होंगी जिसमें हीरो तमाम सुरक्षा तामझाम के बाद भी बड़ी चोरी को अंजाम देते हैं. अब ऐसा ही एक मामला पेरिस से सामने आया है. यहां के लूव्र संग्रहालय पर चोरों ने धावा बोला. आपको बता दें कि ये संग्रहालय दुनिया के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले सांस्कृतिक स्थलों में से एक है. पेरिस पुलिस के अनुसार ये डकैती संग्रहालय के खुलने के कुछ ही देर बाद ही अंजाम दी गई है.

बताया जा रहा है कि हमलावर स्कूटर पर सवार होकर सीन नदी के किनारे निर्माणाधीन इमारत के सामने के हिस्से में घुस गए. मीडिया के अनुसार, घुसपैठियों ने कॉम्पैक्ट चेनसॉ और एक मालवाहक लिफ्ट का इस्तेमाल करके सीधे अपोलो गैलरी में प्रवेश किया, जहां फ्रांस की कुछ सबसे कीमती ऐतिहासिक कलाकृतियां रखी गई हैं. वहां, एक सोची-समझी तोड़फोड़ और लूटपाट की कार्रवाई में, चोरों ने कांच के डिस्प्ले को तोड़ दिया और नेपोलियन बोनापार्ट और महारानी जोसेफिन के नौ अनमोल आभूषण लेकर भाग गए, जिससे फ्रांस का सांस्कृतिक समुदाय स्तब्ध रह गया.

पुलिस के साथ मौके पर मौजूद फ्रांसीसी संस्कृति मंत्री रचिदा दाती ने सोशल मीडिया पर घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि आज सुबह लूव्र संग्रहालय के खुलते ही डकैती हुई. किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है. इस मामले की जांच अभी जारी है.  जांच जारी है. लूव्र म्यूजियम ने भी “असाधारण कारणों” के चलते एक दिन की बंदी का ऐलान किया, और प्रेस समय तक कोई और सार्वजनिक टिप्पणी नहीं की.

अधिकारियों ने अभी तक संदिग्धों की पहचान या संख्या की पुष्टि नहीं की है, हालांकि पुलिस सूत्रों ने अंतर्राष्ट्रीय मीडिया को बताया कि यह कार्रवाई त्वरित, पेशेवर तरीके से अंजाम दी गई. सुरक्षा फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फोरेंसिक साक्ष्यों की समीक्षा की जा रही है क्योंकि जांचकर्ता चोरी किए गए खजाने को बरामद करने और हाल के यूरोपीय इतिहास में सबसे दुस्साहसिक संग्रहालय डकैतियों में से एक के पीछे के अपराधियों की पहचान करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।