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लंबे कद और प्रभावशाली व्यक्तित्व के लिए प्रख्यात हुए भारतीय राजनीति के कद्दावर चेहरे

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– डॉ अतुल मलिकराम

भारतीय राजनीति में कद का तात्पर्य सिर्फ शारीरिक ऊंचाई से नहीं होता. राजनेताओं के विचार, फैसले, संघर्ष और जनता के मन में बनी उनकी छवि, उनके कद को असल मायने में बयान करती है। हालांकि इसमें भी कोई दो राय नहीं कि जब कोई नेता मंच पर खड़ा होता है, तो उसकी लंबी कद-काठी, सधा हुआ आत्मविश्वास और दमदार उपस्थिति पहली नज़र में ही लोगों का ध्यान खींच लेती है।

भारतीय लोकतंत्र ने ऐसे कई कदावर नेताओं को देखा है, जिनकी शारीरिक ऊँचाई उनके वैचारिक और राजनीतिक कद का प्रतीक बन गई है। ये नेता सिर्फ अपनी लम्बाई के लिए नहीं, बल्कि दृढ़ निश्चयी, साहसी और दूरदर्शी सोच के लिए भी पहचाने गए या पहचाने जा रहे हैं। इस कड़ी में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी से लेकर युवा और चर्चित चिराग पासवान जैसे कई नाम शामिल हैं।

आधुनिक भारत का सपना देखने वाले पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की लंबी हाइट और आकर्षक व्यक्तित्व उन्हें युवा भारत का प्रतीक बनाता था। पायलट से प्रधानमंत्री बने राजीव ने टेलीकॉम व आईटी क्रांति की नींव रखी। सबसे युवा पीएम के रूप में आधुनिकीकरण पर जोर दिया। उनकी सहज उपस्थिति जनता से कनेक्ट करती थी। राजीव का योगदान आज भी भारत की प्रगति में जीवंत है।

इस कड़ी में दूसरा नाम पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर राय का है जिन्हे पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबी कद-काठी के लिए याद किया जाता है। उन्होंने कांग्रेस के दिग्गज के रूप में नक्सलवाद जैसी चुनौतियों का सामना किया। पंजाब गवर्नर रहते उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वहीं दो बार लोकसभा स्पीकर रहने का रिकॉर्ड रखने वाले डॉ॰ बलराम जाखड़ अपनी करीब 6.5 फीट ऊंचाई से राजनीति में टावरिंग फिगर कहलाते थे। जाट समुदाय के दिग्गज नेता के रूप में उन्होंने किसान मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया। कृषि मंत्री के रूप में ग्रामीण विकास पर उनका योगदान यादगार है। झाकड़ का सफर बताता है कि ऊंचाई काम से और प्रभावशाली होती है।

राजनाथ सिंह भारतीय राजनीति के उन वरिष्ठ नेताओं में हैं, जिनकी पहचान शोर, आक्रामकता या तीखे भाषणों से नहीं, बल्कि शांत स्वभाव, संतुलित सोच और दृढ़ निर्णय क्षमता से बनी है। उनकी लंबी कद-काठी, सधी हुई चाल और संयमित बॉडी लैंग्वेज मंच पर खड़े होते ही एक अनुभवी, स्थिर और जिम्मेदार नेतृत्व का एहसास कराती है। भीड़ में वे अलग इसलिए दिखाई देते हैं, क्योंकि उनकी मौजूदगी माहौल को उत्तेजित नहीं करती, बल्कि भरोसा और स्थिरता पैदा करती है। इस क्रम में अगला नाम आशीष सिंह पटेल का हो सकता है जो उत्तर प्रदेश की राजनीति में उभरते हुए उस नए नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो परंपरागत सियासत से आगे बढ़कर ज्ञान, तकनीक और सामाजिक सरोकारों को एक साथ जोड़ता है। अपना दल (सोनेलाल) के उपाध्यक्ष के रूप में उन्होंने स्वयं को केवल संगठन चलाने वाले नेता नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति की स्पष्ट दृष्टि रखने वाले रणनीतिकार के रूप में स्थापित किया है।

रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे प्रभावशाली और अलग पहचान रखने वाले नेताओं में हैं। कुंडा से सात बार विधायक चुना जाना उनके मजबूत जनाधार और जनता से गहरे जुड़ाव का प्रमाण है। स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में लगातार जीत उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक ताकत को दर्शाती है। वहीं पूर्व क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू की 6 फीट 2 इंच हाइट और भारी आवाज उन्हें मंच का सितारा बनाती है। क्रिकेट में आक्रामक बल्लेबाजी के बाद राजनीति में आए सिद्धू पंजाब के प्रमुख चेहरों में शुमार हैं। पंचलाइन्स, शायरी और एनर्जेटिक स्टाइल से वे रैलियां जीवंत कर देते हैं। वहीं जम्मू-कश्मीर के दिग्गज फारूक अब्दुल्ला की लंबी कद-काठी और जोशीली शैली उन्हें क्षेत्रीय राजनीति का मजबूत प्रतीक बनाती है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता के रूप में कई बार मुख्यमंत्री रहे फारूक ने कश्मीर मुद्दों को राष्ट्रीय पटल पर रखा।

विदेशी शिक्षा और डॉक्टरी बैकग्राउंड के बावजूद जनता से सीधा कनेक्ट उनकी ताकत है। मंच पर उनकी तेज नजरें और दमदार आवाज प्रभाव छोड़ती है। उनकी ऊंचाई राजनीतिक विरासत को और मजबूत बनाती है।

बिहार के युवा नेता चिराग पासवान की लंबी हाइट और स्टाइलिश लुक उन्हें आधुनिक राजनीति का प्रतीक बनाती है। राम विलास पासवान के बेटे चिराग लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के प्रमुख हैं। केंद्रीय मंत्री के रूप में युवा व दलित मुद्दों पर सक्रिय हैं। फिल्मों से राजनीति में आए चिराग नई पीढ़ी की महत्वाकांक्षा दिखाते हैं।

ये कदावर नेता भारतीय राजनीति के जीवंत प्रतीक हैं, जो साबित करते हैं कि 6 फीट या इससे ज्यादा ऊंचाई केवल शुरुआत है, असली कद जनता के विश्वास, दूरदर्शी विजन और अटूट मेहनत से बनता है।

लेखक राजनीतिक रणनीतिकार हैं.

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