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शनिवारवाड़ा में नमाज पढ़ने के आरोप में तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा, हिंदू संगठनों ने किया प्रदर्शन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

मुंबई. पुणे के ऐतिहासिक शनिावरवाड़ा परिसर में तीन महिलाओं ने हाल ही में नमाज अदा की थी। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। वहीं घटना के बाद विवाद खड़ा हो गया, जिसके बाद अब पुलिस प्रशासन एक्शन मोड में आया है। पुलिस ने अब इस मामले में तीन अज्ञात महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज किया है। पुणे सिटी पुलिस के अनुसार, यह एफआईआर प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष (AMASR) नियम, 1959 के तहत दर्ज की गई है। पुलिस ने बताया कि इन महिलाओं पर संरक्षित स्मारक क्षेत्र में निषिद्ध गतिविधि करने का आरोप लगाया गया है।

नमाज का वीडियो हो रहा वायरल

सूत्रों के मुताबिक, यह घटना शनिवार दोपहर करीब 1.45 बजे हुई थी। इसके बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के एक अधिकारी ने इस संबंध में पुणे सिटी पुलिस को औपचारिक शिकायत दी। वीडियो सामने आने के बाद रविवार को भाजपा सांसद (राज्यसभा) मेधा कुलकर्णी और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के सदस्यों ने शनिावरवाड़ा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने उस स्थान पर ‘शुद्धिकरण पूजा’ भी की, जहां नमाज अदा की गई थी। बता दें कि शनिवारवाड़ा, पेशवा शासनकाल का ऐतिहासिक किला, पुणे का एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। इसे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है।

हिंदू संगठनों ने किया प्रदर्शन

आंदोलन के दौरान हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने परिसर में स्थित मुस्लिम धर्मस्थल (मजार) का विरोध करते हुए उसे हटाने की मांग भी उठाई। इस मुद्दे पर पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच तीखी बहस और हल्की झड़प भी देखने को मिली। हिंदुत्ववादी कार्यकर्ताओं ने मजार के समीप भगवा झंडा फहराने पर अडिग रहते हुए प्रयास जारी रखे। पुलिस की रोक के बावजूद, आखिरकार कार्यकर्ताओं ने मजार के पास ही भगवा झंडा लगा भी दिया। इसके बाद जयघोष करते हुए आंदोलन समाप्त किया गया। घटना के बाद परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया था। हालांकि पुलिस प्रशासन ने तत्परता से स्थिति को नियंत्रित किया।

साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।