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अफगानिस्तान पर हमला किया तो पाकिस्तान जड़ से मिट जाएगा: फसीहुद्दीन फितरत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

काबुल. पाकिस्तान और अफगानिस्तान में जारी तनाव के बीच तालिबान के आर्मी चीफ फसीहुद्दीन फितरत ने इस्लामाबाद को खुली चेतावनी दी है। अफगानिस्तान की तालिबान सेना के चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा कि इतिहास ने सिद्ध कर दिया है कि जो कोई भी हमारे देश पर आक्रमण करने की कोशिश करता है, वह अंततः अपनी जड़ों पर ही प्रहार करता है।’ तालिबान आर्मी चीफ की टिप्पणी दोहा में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के एक दिन बाद आई है। इस समझौते के बाद पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच कई दिनों तक चली हिंसक झड़प रुक गई है। हालांकि, दोनों पक्षों में तनाव बना हुआ है।

पाकिस्तान ने पिछले सप्ताह अफगानिस्तान के पक्तिका प्रांत में बमबारी की थी, जिसमें करीब 10 लोग मारे गए थे और 100 से ज्यादा घायल हुए थे। पाकिस्तानी सेना के हमलों के संबंध में फितरत ने जोर देकर कहा कि इस्लामिक अमीरात इस मामले में पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि अफगानिस्तान की धरती पर अतिक्रमण करने वाले किसी भी व्यक्ति को निर्णायक और करारा जवाब मिलेगा।

तालिबान रक्षा मंत्री का टीटीपी पर बड़ा बयान

इस बीच तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका देते हुए कहा है कि वह तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी को आतंकवादी संगठन नहीं मानता है। मुल्ला याकूब ने कहा कि पाकिस्तान अपने विरोधियों के खिलाफ राजनीतिक उद्देश्यों के लिए आतंकवाद के ठप्पे का इस्तेमाल करता है।

याकूब ने अल-जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि अफगान सरकार तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को आतंकवादी समूह नहीं कहती है। इस लेबल का इस्तेमाल पाकिस्तान सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों के लिए करती है और इसका अफगान सरकार से कोई संबंध नहीं है। याकूब ने कहा है कि अफगान सरकार की नीति है कि वह किसी भी सशस्त्र समूह का समर्थन नहीं करती, उन्हें अफगानिस्तान में कोई ठिकाना नहीं देती और उनकी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं देती।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।