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मैक्सिको की फातिमा बॉश बनी मिस यूनिवर्स 2025, भारतीय सुंदरी मानिका विश्वकर्मा टॉप 12 राउंड में हो गई थीं बाहर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

नई दिल्ली. मिस यूनिवर्स 2025 21 नवंबर को आयोजित किया गया, जिसमें मेक्सिको की फातिमा बॉश ने 100 से ज्यादा कंटेस्टेंट को हराकर 74वीं मिस यूनिवर्स का टाइटल अपने नाम कर लिया है. 73वीं मिस यूनिवर्स डेनमार्क की विक्टोरिया कजर थीलविग ने पेजेंट के फिनाले में विनर का ताज Fatima Bosch को पहनाया. जो लोग नहीं जानते उन्हें बता दें कि थाईलैंड की प्रवीणर सिंह रनर अप रहीं. जबकि दूसरी रनरअप वेनेजुएला की स्टेफनी अबासेली रहीं. वहीं तीसरी रनरअप फिलीपींस की मा आहतिशा मनालो रहीं.

कौन है फातिमा बॉश?

मेक्सिको के तबास्को के विलाहर्मोसा की रहने वाली फातिमा बॉश को बधाई देते हुए मिस यूनिवर्स के इंस्टाग्राम पेज पर वीडियो शेयर किया गया, जिसमें फातिमा बॉश काफी इमोशनल नजर आ रही हैं. वहीं उनके सिर पर सजा ताज उनकी खूबसूरती पर चार चांद लगा रहा है.

मिस यूनिवर्स 2025 बनीं फातिमा बॉश?

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इस वीडियो को देखने के बाद फैंस बधाई देते हुए नजर आ रहे हैं. वहीं उन्हें मिस यूनिवर्स 2025 के खिताब की हकदार बताते हुए नजर आ रहे हैं. सोशल मीडिया पर फातिमा को बधाई देने का सिलसिला शुरू हो गया है. वहीं लोग रिएक्शन देते हुए नजर आ रहे हैं.

मिस यूनिवर्स 2025 में भारत?

मिस यूनिवर्स 2025 की रेस से भारत का प्रतिनिधित्व कर रहीं मानिका विश्वकर्मा टॉप 12 राउंड में बाहर हो गई थीं. जबकि उन्होंने टॉप 30 में अपनी जगह बनाई थी. हालांकि उनके प्रतियोगिता से बाहर निकलने के बाद फैंस को झटका लगा था और वह सोशल मीडिया पर रिएक्शन देते हुए नजर आ रहे हैं.

साभार : एनडीटीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।