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जेडीयू ने एनडीए से अलग होने की बात करने वाले अपने मणिपुर अध्यक्ष को हटाया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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इंफाल. जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि मणिपुर को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, वहां की एनडीए सरकार को समर्थन जारी रहेगा, मणिपुर जदयू के अध्यक्ष को अनुशासनहीनता के आरोप में हटाया जा चुका है। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, “यह भ्रामक और निराधार है। पार्टी ने इसका संज्ञान लिया है और पार्टी की मणिपुर इकाई के अध्यक्ष को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। हमने एनडीए का समर्थन किया है और हमारा समर्थन जारी रहेगा।”

उन्होंने आगे कहा कि मणिपुर में एनडीए सरकार आगे भी जारी रहेगी। मणिपुर इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व से कोई संवाद नहीं किया, उन्हें (मणिपुर जेडीयू प्रमुख) ने अपनी मर्जी से पत्र लिखा था अनुशासनहीनता पर उनके खिलाफ कार्रवाई कर पदमुक्त कर दिया गया है… हम एनडीए के साथ हैं और राज्य इकाई राज्य के विकास के लिए मणिपुर के लोगों की सेवा करना जारी रखेगी।”

एक चिट्ठी की वजह से मची थी खलबली

मणिपुर की एनडीए सरकार से जेडीयू के समर्थन वापसी की चिट्ठी जारी होने के बाद दिल्ली से पटना तक सियासी खलबली मच गई। आनन-फानन में किसी तरह हालात को संभाला गया और  मणिपुर जदयू के अध्यक्ष बीरेन सिंह पर एक्शन लेते हुए उन्हें उनके पद से हटा दिया गया। उनकी ही गलती थी कि उन्होंने अपनी चिट्ठी में जेडीयू को एनडीए से अलग होने का दावा कर उसे जारी कर दिया था।

इसके बाद जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इस लेटर को ही गलत बताया और कहा कि पार्टी अब भी एनडीए के साथ है। मणिपुर में एनडीए की सरकार बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि मणिपुर के जदयू नेता ने ये अनुशासनहीनता की थी और इसलिए उन्हें उनके पद से हटाया गया है। राजीव रंजन ने बताया कि उन्होंने बिना केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत किए यह पत्र लिखा था।

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साभार : इंडिया टीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।