लोड हो रहा है...

अमेरिकी कोर्ट ने बायजू के संस्थापक रवींद्रन को लगभग 8900 करोड़ रुपए चुकाने का दिया आदेश

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

वाशिंगटन. बायजूस के संस्थापक बायजू रवींद्रन को अमेरिका की एक बैंकरप्सी कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कोर्ट में कई बार पेशी पर अनुपस्थित रहने और जरूरी दस्तावेज जमा करने के आदेशों की अनदेखी के कारण कोर्ट ने उन्हें 107 करोड़ डॉलर, यानी लगभग 9,591 करोड़ रुपये, चुकाने का आदेश दिया है.

कोर्ट ने झटका क्यों दिया?

20 नवंबर को सुनाए गए आदेश में डेलावेयर बैंकरप्सी कोर्ट के जज ब्रेंडन शैनन ने बायजूस की अमेरिकी फाइनेंशियल यूनिट Byju’s Alpha को पैसों के गलत ट्रांजेक्शन और उन्हें छिपाने के लिए जिम्मेदार ठहराया है.

दरअसल, साल 2021 में Byju’s Alpha को एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में बनाया गया था. इसका उद्देश्य बायजूस के लिए ग्लोबल लेंडर्स कंसोर्टियम से लगभग 120 करोड़ डॉलर का टर्म लोन जुटाना था. इसका कोई स्वतंत्र ऑपरेटिंग बिजनेस नहीं था, इसलिए यह एक होल्डिंग एंटिटी के रूप में काम करता था, जिससे लोन की पूरी राशि का उपयोग किया जा सके.

- Advertisement -

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

मामला तब कोर्ट पहुंचा जब 55.3 करोड़ डॉलर की एक बड़ी रकम इसी यूनिट के जरिए ट्रांसफर की गई. यह पैसा मियामी के एक हेज फंड Camshaft Capital को भेजा गया और वहां से बायजूस तथा उससे जुड़ी अन्य एंटिटीज को ट्रांसफर किया गया. कोर्ट ने पाया कि इस लेन-देन में बायजूस के संस्थापक बायजू रवींद्रन की प्रत्यक्ष भूमिका रही, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कड़ा फैसला सुनाया गया.

कोर्ट ने बायजूस के फाउंडर बायजू रवींद्रन को निर्देश दिया है कि वे Alpha फंड्स के पूरे अकाउंट्स प्रस्तुत करें. इसमें Camshaft Capital को भेजे गए 53.3 करोड़ डॉलर, उस निवेश से बनी लिमिटेड पार्टनरशिप इंटरेस्ट, और अन्य पैसों के ट्रांसफर से जुड़ी सभी जानकारी शामिल करने को कहा गया है. बायजू को हालांकि कोर्ट की तरफ से जो पैनाल्टी लगाई गई है, उसे तुरंत नहीं देना है. लेकिन, यह रवींद्रन के लिए बड़ा झटका है और अगर इसे अपर कोर्ट की तरफ से नहीं पलटा जाता है तो फिर उन्हें इसे आदेश को मानने के लिए बाध्य होना पड़ेगा.

साभार : एबीपी न्यूज

‘गांधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ पुस्तक के बारे में जानने के लिए लिंक पर क्लिक करें :

- Advertisement -

https://matribhumisamachar.com/2025/12/10/86283/

आप इस ई-बुक को पढ़ने के लिए निम्न लिंक पर भी क्लिक कर सकते हैं:

https://www.amazon.in/dp/B0FTMKHGV6

यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।