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ममता बनर्जी की पश्चिम बंगाल पुलिस ने खंडित की मां काली की मूर्ति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

कोलकाता. पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के काकद्वीप इलाके में काली पूजा के दौरान बवाल मच गया. एक गांव के मंदिर में मां काली की मूर्ति खंडित मिलने के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. ग्रामीणों ने इसे धार्मिक आस्था से जुड़ा मुद्दा बताते हुए राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया.

इस बीच बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया साइट X पर आरोप लगाया कि ‘जिहादियों’ ने मूर्ति को नुकसान पहुंचाया और पुलिस इसे छिपाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने लिखा, “ममता बनर्जी की पुलिस ने आखिरकार मां काली को प्रिजन वैन में उठा लिया… शर्मनाक!” शुभेंदु अधिकारी के इस पोस्ट के बाद मामला राजनीतिक रंग लेता चला गया.

WB पुलिस का जवाब – भ्रामक जानकारी फैलाई जा रही है

मामले पर पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने X हैंडल से बयान जारी कर कहा कि कुछ लोग काकद्वीप की घटना को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं. पुलिस के अनुसार सूर्यानगर ग्राम पंचायत के तहत एक गांव के मंदिर में सुबह काली मां की मूर्ति खंडित हालत में मिली थी. जांच चल रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.

गांव में तनाव, पुलिस ने संभाला मोर्चा

पुलिस ने बताया कि घटना के बाद स्थानीय लोगों ने राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम कर दिया था और खंडित मूर्ति को वहीं रखकर विरोध किया. कई घंटों तक बातचीत के बावजूद प्रदर्शनकारी नहीं माने और पुलिस पर पत्थरबाजी शुरू कर दी. इस पर पुलिस को “न्यूनतम बल” का प्रयोग करना पड़ा ताकि यातायात बहाल किया जा सके. इसके बाद मूर्ति के विसर्जन की प्रक्रिया पूरी की गई.

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शुभेंदु अधिकारी ने ममता सरकार पर साधा निशाना

बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “यह बंगाल की संस्कृति पर हमला है” और प्रशासन “हिंदुओं की आस्था के खिलाफ काम कर रहा है.” उन्होंने कहा कि काकद्वीप के लोगों ने “पुलिस के अन्याय” के खिलाफ एकजुट होकर विरोध किया है. अधिकारी के इस बयान ने सोशल मीडिया पर बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया.

साभार : न्यूज18

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।