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गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी की वेब सीरीज ‘यूपी 77’ की रिलीज रोकने की याचिका पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे के एनकाउंटर से जुड़ी वेब सीरीज ‘यूपी 77’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है। इस मच अवेटेड सीरीज को लेकर अब मामला दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। विकास दुबे की पत्नी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार और वेब सीरीज के निर्माताओं से जवाब मांगा है। याचिका में मांग की गई है कि इस सीरीज की रिलीज पर रोक लगाई जाए, क्योंकि यह कथित तौर पर विकास दुबे के जीवन पर आधारित है।

मंगलवार को मामले में हुई सुनवाई 
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सचिन दत्ता की पीठ ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों से अपना पक्ष रखने को कहा। कोर्ट ने साफ किया कि वह सभी दलीलें सुनने के बाद ही कोई अंतिम फैसला लेगा। मामले की अगली सुनवाई बुधवार को निर्धारित की गई है, जहां यह तय हो सकता है कि सीरीज की रिलीज पर रोक लगेगी या नहीं।

बताया जा रहा है कि ‘यूपी 77’ को 25 दिसंबर को वेव्स ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाना है। रिलीज से ठीक पहले इस तरह का कानूनी विवाद सामने आने से मेकर्स की मुश्किलें बढ़ गई हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि इस वेब सीरीज के जरिए एक ऐसे व्यक्ति की कहानी को दिखाया जा रहा है, जिसे लेकर अब भी कानूनी और सामाजिक संवेदनाएं जुड़ी हुई हैं। साथ ही, परिवार की निजता और सम्मान को ठेस पहुंचने की आशंका भी जताई गई है।

पुलिस एनकाउंटर में मारा गया था विकास दुबे
गौरतलब है कि विकास दुबे वही नाम है, जिसने साल 2020 में पूरे देश को हिला दिया था। कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में वह मुख्य आरोपी था। लंबे समय तक फरार रहने के बाद उसने उज्जैन में आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद जब उसे मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश लाया जा रहा था, उसी दौरान पुलिस एनकाउंटर में उसकी मौत हो गई। पुलिस का दावा था कि वाहन पलटने के बाद उसने भागने की कोशिश की, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई।

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इस एनकाउंटर को लेकर उस समय भी कई सवाल उठे थे और आज भी यह मामला लोगों की यादों में ताजा है। ऐसे में विकास दुबे के जीवन से प्रेरित बताई जा रही वेब सीरीज पर आपत्ति जतना कई लोगों को स्वाभाविक लग रहा है। याचिका में यह भी कहा गया है कि किसी आपराधिक मामले को मनोरंजन का जरिया बनाना समाज पर गलत प्रभाव डाल सकता है।

कोर्ट का अंतरिम रोक लगाने से इनकार
वहीं, कोर्ट ने फिलहाल कोई अंतरिम रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा है कि पहले सभी पक्षों की बात सुनी जाएगी। केंद्र सरकार और वेब सीरीज के निर्माता अब अपना पक्ष रखेंगे, जिसके बाद कोर्ट तय करेगा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। अब सबकी नजरें बुधवार की सुनवाई पर टिकी हैं। अगर कोर्ट रिलीज पर रोक लगाता है, तो यह ओटीटी कंटेंट और सच्ची घटनाओं पर आधारित वेब सीरीज के लिए एक बड़ा कानूनी उदाहरण बन सकता है। वहीं, अगर रिलीज को हरी झंडी मिलती है, तो यह बहस और तेज हो सकती है कि अपराध और अपराधियों की कहानियों को किस हद तक दिखाया जाना चाहिए।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।