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गोलीकांड में पूर्व विधायक अनंत सिंह का आत्मसमर्पण

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. मोकामा गोलीकांड में पूर्व विधायक व बाहुबली अनंत सिंह ने सरेंडर कर दिया है। पटना पुलिस उनकी गिरफ्तारी की तैयारी में थी। इसके लिए सुबह से ही तैयारी चल रही थी। कई थानों की फोर्स भी अनंत सिंह के गांव में जाने वाली थी। लेकिन, उन्होंने सबकों चौकाते हुए बाढ़ कोर्ट में सरेंडर कर दिया है। कोर्ट के बाहर बाहुबली के समर्थकों की भीड़ उमड़ चुकी है। बताया जा रहा है कि मोकामा गोलीकांड में पटना पुलिस ने पूर्व विधायक अनंत सिंह पर आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में केस दर्ज किया है। इतना ही नहीं अनंत सिंह पर पुलिस कर्मियों से धक्का-मुक्की करने, अभद्र व्यवहार, सरकारी काम में बाधा पहुंचाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इस मामले के बाद विपक्ष पर नीतीश सरकार पर सवाल उठा रही थी।

बता दें कि बाहुबली अनंत सिंह से पहले मोकामा गोलीकांड में आरोप सोनू सिंह ने पुलिस दबिश पर सरेंडर कर दिया है। मोकामा गोलीकांड के बाद से पटना पुलिस उसकी तलाश कर रही थी। सोनू के ऊपर मुंशी के साथ मारपीट करने, उसके घर पर ताला जड़कर और गोलीबारी का आरोप है। शुक्रवार सुबह सोनू ने पंचमहला थाने में जाकर सरेंडर कर दिया है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। वहीं पटना पुलिस ने अनंत सिंह के समर्थक रोशन सिंह को भी गिरफ्तार किया है। दरअसल, बुधवार को पंचमहला थाने के नौरंगा गांव में पूर्व विधायक के समर्थकों और मुखिया कुमारी उर्मिला सिन्हा के बेटे व गैंगस्टर सोनू-मोनू के बीच कई राउंड फायरिंग हुई। इस दौरान अनंत सिंह घटनास्थल से चंद कदम दूरी पर ही मौजूद थे। घटना के बाद इलाके में हड़कंप है। पुलिस लगातार कैंप कर रही है। ग्रामीए एसपी विक्रम सिहाग का कहना है कि हालात नियंत्रण में हैं। मौके पर ही पिस्टल और कट्टा बरामद किए गए थे। इस मामले में कुल तीन प्राथमिकी दर्ज की गई है। लोगों से पूछताछ चल रही हैै। मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जानिए, गोलीकांड के बाद क्या कहा था अनंत सिंह ने

पूर्व विधायक अनंत सिंह ने कहा कि बुधवार को 10 से 15 लोग मेरे पास न्याय की गुहार लगाने आए थे। मैंने पूछा आपलोग क्यों आए हैं? तो उन्होंने कहा कि मेरे घर में सोनू-मोनू ने ताला लगा दिया है। घर से भगा दिया और 10 हजार रुपये मांग रहे हैं। इसके बाद मैंने इनलोगों थाने जाकर डीएसपी साहब से मिलने की सलाह दी। यह लोग पुलिस के पास गए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ तो  मैं इनलोगों के साथ गया। इनके घरों का ताला खुलवा दिया। ग्रामीणों की अपील पर मैंने सोनू-मोनू के घर जाकर उन्हें समझाने की। लेकिन, दोनों मुझे देखते ही भागने लगे और फायरिंग करने लगे। इसी दौरान मेरे एक आदमी को गोली लग गई। इसके बाद मुझे बचाने आए लोगों के ओर से भी हवाई फायरिंग की गई। इसी दौरान सोनू-मोनू फरार हो गए। पुलिस से अपील है कि आम लोगों की सुरक्षा में अगर इतना समय लगाएंगे तो क्या होगा? लोगों का घर लूटा जा रहा है और आप लिखित शिकायत देने की बात कहते हैं। शिकायत पर अगर फौरन कार्रवाई होती तो आज यह नौबत नहीं आती। सोनू-मोनू के आतंक से इलाके के लोग परेशान हैं। दोनों लोगों के घर लूटते हैं। रंगदारी मांगते हैं। जनता में डर का माहौल है।

साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।