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स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों का विकास

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रक्षा मंत्रालय  स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों के अनुसंधान एवं विकास हेतु धनराशि आवंटित कर रहा है। पिछले तीन वर्षों के दौरान, डीआरडीओ को 29,558.66 करोड़ रुपये की परियोजनाएँ स्वीकृत की गईं। इस संबंध में धनराशि का वार्षिक विवरण निम्नलिखित है :

वर्ष स्वीकृत परियोजनाओं की संख्या लागत (करोड़ रुपये में)
01-जनवरी-2023 से 31-दिसंबर-2023 40 3,842.71 करोड़ रुपये
01-जनवरी-2024 से 31-दिसंबर-2024 43 22,175.49 करोड़ रुपये
01-जनवरी-2025 से अब तक 20 3,540.46 करोड़ रुपये

कावेरी व्युत्पन्न इंजन (केडीई), रिमोटली पायलटेड स्ट्राइक एयरक्राफ्ट (आईयूसीएवी एयरक्राफ्ट) के लिए पावर प्लांट है। इस संबंध में दो परियोजनाओं को अनुमति दी गई है। इसमें 472.42 करोड़ रुपये की लागत से उड़ान-योग्य कावेरी ड्राई इंजन विकास और 251.17 करोड़ रुपये की लागत से कावेरी व्युत्पन्न ‘ड्राई’ इंजन का प्रौद्योगिकी प्रदर्शन सम्मिलित है।

रक्षा पारिस्थितिकी प्रणाली में नागरिक-सैन्य साझेदारी को बढ़ाने के लिए कई संरचनात्मक सुधार किए जा रहे हैं। कुछ प्रमुख सुधार निम्नलिखित हैं:

· तेजी से प्रोटोटाइप विकास और उत्पादन चरण में तेजी से संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए विकास-सह-उत्पादन-भागीदारों (डीसीपीपी) की पहचान की गई है, जिससे रक्षा पारिस्थितिकी प्रणाली में वृद्धि हुई है।

· डीआरडीओ उद्योग अकादमी-उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए-सीओई) के माध्यम से शैक्षणिक परियोजनाओं के माध्यम से विकसित प्रौद्योगिकियों को तेजी से साकार करने के लिए उद्योगों को सम्मिलित किया गया है।

· डीआरडीओ की प्रमाणन एजेंसी, सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थनेस एंड सर्टिफिकेशन (सेमिलैक), मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) प्रमाणन में साझा दृष्टिकोण अपनाने के लिए अपने घरेलू नागरिक समकक्ष, यानी डीजीसीए के साथ मिलकर काम कर रही है। सेमिलैक के रक्षा मंत्रालय द्वारा अनुमोदित मार्गदर्शक दस्तावेज़ प्रमाणन, आईएमटीएआर वी2.0, ने कम भार वाले यूएवी के लिए नागरिक ड्रोन प्रमाणन को अपनाने का प्रावधान किया है, जिससे नागरिक और सैन्य दोनों तरह के उपयोग के लिए समान प्रमाणन मानदंड संभव हो सके।

· सीईएमआईएलएसी प्रमाणन के लिए नागरिक-सैन्य व्युत्पन्न विमान पद्धति के लिए प्रमाणन एजेंसियों (ईएएसए और एएनएसी) और विमान ओईएम (एयरबस और एम्ब्रेयर) के साथ भी बातचीत कर रहा है ताकि घरेलू डीसीपीपी भारत में प्रमाणन प्राप्त कर सके।

डीआरडीओ ने रक्षा औद्योगिक कारिडोर के विकास के लिए विचारों, संसाधनों और विशेषज्ञता को साझा करने के लिए ज्ञान भागीदार के रूप में सहयोग करने के लिए रक्षा औद्योगिक गलियारों टाइडेल पार्क लिमिटेड और यूपीईआईडीए के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

डीआरडीओ ने चिन्हित क्षेत्रों में रक्षा और सुरक्षा के लिए नई प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु निर्देशित अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आईआईएससी बैंगलोर, विभिन्न आईआईटी और केंद्रीय/राज्य विश्वविद्यालयों में देश भर में 15 डीआरडीओ उद्योग अकादमिक उत्कृष्टता केंद्र (डीआईए-सीओई) स्थापित किए हैं।

डीआरडीओ ने अपने उद्योग भागीदारों (विकास सह उत्पादन भागीदार (डीसीपीपी)/विकास भागीदार (डीपी)) के लिए शून्य टीओटी शुल्क और भारतीय सशस्त्र बलों और सरकारी विभागों को आपूर्ति के लिए शून्य रॉयल्टी के साथ एक नई टीओटी नीति और प्रक्रिया विकसित की है।

· डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में अब उद्योगों के लिए कई विश्व स्तरीय परीक्षण सुविधाएं खोल दी गई हैं और आवश्यक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर ली गई हैं।

· डीआरडीओ के पेटेंट उद्योगों द्वारा उपयोग के लिए डीआरडीओ की वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। आत्मनिर्भर भारत को सक्षम बनाने के लिए ये पेटेंट उद्योगों को निःशुल्क उपलब्ध हैं।

डीआरडीओ ने प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीडीएफ) शुरू किया है जो नवीन रक्षा उत्पादों के डिजाइन विकास के लिए भारतीय उद्योगों को वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

· भारतीय वैज्ञानिक समुदाय के माध्यम से नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए डिफेंस एक्सपो के दौरान 10 समस्या-विवरणों के साथ डेयर टू ड्रीम 4.0 प्रतियोगिता शुरू की गई। डेयर टू ड्रीम, रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में नवाचारों के लिए व्यक्तियों और स्टार्ट-अप्स को प्रोत्साहित करने की एक योजना है।

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने आज लोकसभा में यह जानकारी श्री तेजस्वी सूर्या को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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