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हास्य अभिनेता सतीश शाह का 74 वर्ष की आयु में निधन

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
2 Min Read

मुंबई. भारतीय टेलीविजन और सिनेमा के दिग्गज हास्य अभिनेता सतीश शाह का निधन हो गया है. सतीश शाह बॉलीवुड के उन कलाकारों में रहे हैं जो अपनी कमाल की कॉमिक टाइमिंग के लिए पहचाने जाते थे. जितनी पहचान उन्हें फिल्मों से मिली, उतने ही पॉपुलर वे टेलीविजन की दुनिया में भी थे. सतीश शाहग ने ने अपने चुलबुले अंदाज से दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी है. सतीश शाह ने अपने फिल्मी करियर में लगभग 250 फिल्मों में काम किया. उनका जन्म 25 जून, 1951 में बॉम्ब में हुआ था. सतीश शाह ने 1972 नें डिजाइनर माधु शाह से शादी की थी.

1984 के सिटकॉम ये जो है जिंदगी में वह कमाल के रोल में नजर आए थे. इसका निर्देशन कुंदन शाह और मंजुल सिन्हा ने किया था. वो 55 एपिसोड में नजर आए और हर एपिसोड में उनका एक अलग ही किरदार हुआ करता था. इस तरह उन्होंने एक ही सीरियल में 55 किरदार निभाए. ‘साराभाई वर्सेज साराभाई’ में किरदार निभाकर वे घर-घर मशहूर हो गए. इसमें उन्होंने इंद्रवर्धन साराभाई का किरदार निभाया था. इसके अलावा वे जीटीवी के 1995 में आएओ शो फिल्मी चक्कर से भी लोकप्रिय हुए. इन दोनों ही सीरियल में वह रत्ना शाह पाठक के साथ नजर आए. इसके अलावा वह घर मजाई और ऑल द बेस्ट में भी नजर आए. इसके अलावा कॉमेडी सर्कस में बतौर जज भी उन्होंने काम किया.

सतीश शाह का सफर 1980 के दशक से शुरू हुआ. ‘जाने भी दो यारो’ (1983) में म्युनिसिपल कमिश्नर डी’मेलो का किरदार ने उन्हें जबरदस्त लोकप्रियता दिलाई. ‘मैं हूं ना’, ‘कल हो ना हो’, ‘फना’, ‘वीराना’ और ‘ओम शांति ओम’ जैसी फिल्मों में उनके संवाद आज भी हंसाते हैं. वे सैफ अली खान की 2014 की फिल्म ‘हमशक्ल्स’ में भी नजर आए.

साभार : एनडीटीवी

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।