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भारतीय सेना के सैनिकों को सशर्त सोशल मीडिया प्रयोग की मिली अनुमति

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारतीय सेना ने अपनी सोशल मीडिया पॉलिसी में एक और बड़ा बदलाव किया है। अब सेना ने अपने सैन्यकर्मियों को इंस्टाग्राम चलाने की इजाजत दे दी है। लेकिन, शर्त ये है कि वे इसका इस्तेमाल सिर्फ व्यू-ऑनली मोड में कर सकेंगे। सेना के जवानों और अफसरों पर इस बात की पाबंदी रहेगी कि वे न तो इंस्टाग्राम पर मेलजोल बढ़ाएं और न ही उन्हें किसी भी कंटेंट को पोस्ट करने, लाइक या कमेंट करने की ही इजाजत मिलेगी, जैसा कि आम सोशल मीडिया यूजर्स कर सकते हैं।

इंस्टाग्राम पर ‘निष्क्रीय भागीदारी’

एनडीटीवी ने मामले की जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी है कि सैन्यकर्मियों को भारतीय सेना की ओर से इंस्टाग्राम इस्तेमाल करने की अनुमति मिलने के पीछे की सोच ये है कि वे कंटेंट देखकर और उसपर निगरानी रखकर वे अपनी जागरूकता बढ़ा सकेंगे और जानकारियां जुटा सकें। सेना ने इस सीमित अनुमति को ‘निष्क्रीय भागीदारी’ बताया है, जिसमें यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि उन्हें कंटेंट देखने के अलावा किसी चीज की इजाजत नहीं मिलेगी।

यूट्यूब , एक्स का भी ‘निष्क्रीय इस्तेमाल’

सेना को इसका एक फायदा यह भी होगा कि इससे जवान फर्जी और भ्रामक पोस्ट से जुड़ी जानकारियां अपने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ साझा कर सकेंगे। इसी तरह की पाबंदियां यूट्यूब और एक्स जैसे अन्य सोशल मीडिया पोस्ट के लिए भी जारी रहेंगी, इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार इन्हें भी ‘निष्क्रीय इस्तेमाल’ की ही अनुमिति दी गई है। भारतीय सेना की ओर से समय-समय पर सोशल मीडिया इस्तेमाल को लेकर गाइडलाइंस जारी होती रही हैं और पहले सुरक्षा वजहों से इन पर पाबंदी लगी हुई थी।

2019 तक बहुत ही सख्त थे सेना के नियम

2019 तक सैन्यकर्मियों को किसी सोशल मीडिया ग्रुप का हिस्सा बनने की इजाजत नहीं थी। जब सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल के कई मामले सामने आए तो सेना ने 2020 में नियम को और कड़ा कर दिया और सैन्यकर्मियों को 89 मोबाइल ऐप डिलीट करने के निर्देश दिए। हालांकि, सख्त नियमों के बावजूद सेना ने कुछ प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक , यूट्यूब, एक्स, लिंक्डइन,टेलीग्राम और व्हाट्सऐप के इस्तेमाल की अनुमति दे रखी है, लेकिन सख्त नियमों और निगरानी के साथ।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।