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देवेंद्र फडणवीस ने गणतंत्र दिवस पर खोला कोस्टल रोड का आखिरी हिस्सा

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. मुंबईवासियों को 76वें गणतंत्र दिवस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बड़ी सौगात दी। सीएम फडणवीस ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के साथ कोस्टल रोड के आखिरी चरण का शुभारंभ किया। अब मुंबईकर नरीमन प्वाइंट से बांद्रा सिर्फ 15 मिनट में पहुंच जाएंगे। पहले नरीमन पॉइंट से बांद्रा पहुंचने में एक से डेढ़ घंटे का समय लगता था। मुंबईकर कोस्टल रोड के हिस्से पर सोमवार से फर्राटा भर सकेंगे। राज्य सरकार के अनुसार मुंबई के लोगों के यह रोड सुबह सात बजे से रात 12 बजे तक खुली रहेगी। कोस्टल रोड के इस हिस्से की कुल लंबाई 10.58 किमी है। सीएम फडणवीस के उद्घाटन करने के बाद अब मुंबईकर मुंबईकर मरीन ड्राइव से कोस्टल रोड, वर्ली-बांद्रा सी लिंक होते हुए वेस्टर्न एक्सप्रेस हाइवे पकड़ कर दहिसर तक सिग्नल फ्री सफर कर सकेंगे।

सात साल में पूरा हुआ सपना

मुंबईकरों ने कोस्टल रोड का 7 साल तक इंतजार किया। इसकी डेडलाइन बढ़ने के कारण निर्माण की लागत 8,000 करोड़ से बढ़कर 13,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी। कोस्टल रोड का निर्माण कार्य अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ था, तब बीएमसी ने इसे दिसंबर 2023 में खोलने का दावा किया था, लेकिन पूरी कोस्टल 2025 की जनवरी में खुल पाई। राज्य सरकार ने इस कोस्टल रोड का नाम धर्मवीर स्वराज्यरक्षक छत्रपति संभाजी महाराज मुंबई तटीय मार्ग रखा है। सीएम फडणवीस ने उत्तरी भाग का उद्घाटन किया। मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने कहा कि तटीय सड़क से मुंबईवासियों का यात्रा समय और ईंधन बचेगा तथा प्रदूषण से मुक्ति दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

27 जनवरी से फर्राटा भरेंगे मुंबईकर

इस अवसर पर मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि मुंबई तटीय सड़क का 94 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और आज उत्तरवाहिनी मार्ग का उद्घाटन किया गया है। यह सड़क गणतंत्र दिवस पर नागरिकों को समर्पित की जा रही है। यह मार्ग तीन अन्य अंतर-मॉडल मार्गों के साथ 27 जनवरी से खुल जाएगा। उन्होंने कहा कि इसमें मरीन ड्राइव से प्रभादेवी तक का इंटरलेन, मरीन ड्राइव से बिंदुमाधव ठाकरे चौक तक का इंटरलेन और बिंदुमाधव ठाकरे चौक को सी ब्रिज से जोड़ने वाला और बांद्रा की ओर जाने वाला इंटरलेन शामिल है।

साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।