लोड हो रहा है...

राजौरी में एक्सीडेंटल फायरिंग के कारण फैली आतंकवादी हमले की अफवाह

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के राजौरी में सेना की गाड़ी पर आतंकी हमला नहीं हुआ था. शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह एक्सीडेंटल फायरिंग थी. सेना के वाहन के मूवमेंट के दौरान यह घटना हुई. हालांकि इस पर अबतक सेना के किसी अधिकारी का बयान नहीं आया है. इससे पहले सूत्रों ने बताया था कि रौजारी के सुंदरबनी सेक्टर में करीब 12.45 बजे सेना की एक गाड़ी पर 4 से 5 राउंड फायरिंग हुई. आंतकी इस घटना को अंजाम देकर तुरंत मौके से फरार हो गए. इस घटना में किसी के घायल या हताहत होने की खबर नहीं है. इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया गया है और आतंकियों की तलाश की जा रही है.

इलाके में सुबह से ही चल रहा था सर्च ऑपरेशन

बताया गया था कि जहां पर ये हमला हुआ, वो सुंदरबनी इलाका एलओसी से सटा हुआ है. यहां सुबह से ही सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था, उसी दौरान सेना का गाड़ी पर हमला हुआ. हालांकि इस पर सेना ने अबतक आधिकारिक रूप से पुष्टि नहीं की है. ये इलाका पाकिस्तान सीमा से सटा हुआ है, इसलिए पुलिस को फिलहाल वहां नहीं जाने दिया गया. सेना ही वहां सर्च ऑपरेशन चला रही है. पूरे इलाके में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है. ये भी सामने आया है कि फायरिंग एक ही तरफ से हुई है, हमलावर फायरिंग के तुरंत बाद भाग गए और आस-पास के इलाकों में जाकर छिप गए. सेना के जवानों को जवाबी फायरिंग का मौका भी नहीं मिला.

बीती 7 फरवरी को मारे गए थे 7 घुसपैठिए

भारतीय सेना ने 7 फरवरी को पाकिस्तान के 7 घुसपैठियों को मार गिराया था, वो जम्मू-कश्मीर के पुंछ इलाके में घुसपैठ की कोशिश कर रहे थे. इनमें से 2-3 पाकिस्तानी सेना के जवान थे, जबकि कुछ अल बद्र संगठन से जुड़े हो सकते हैं. यह संगठन पाकिस्तान समर्थित आतंकी समूहों में से एक है, जो भारतीय क्षेत्र में हिंसा फैलाने की कोशिश करता रहता है.

साभार : एबीपी न्यूज

- Advertisement -

भारत : 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि) व/या भारत : 1857 से 1957 (इतिहास पर एक दृष्टि) पुस्तक अपने घर/कार्यालय पर मंगाने के लिए आप निम्न लिंक पर क्लिक कर सकते हैं

सारांश कनौजिया की पुस्तकें

ऑडियो बुक : भारत 1885 से 1950 (इतिहास पर एक दृष्टि)

Related Post

Share This Article
Follow:
लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।