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श्रेयस अय्यर बाईं पसली में झटका लगने के कारण कम से कम तीन हफ्ते के लिए मैदान से रहेंगे बाहर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत के नए वनडे उप कप्तान श्रेयस अय्यर को कम से कम तीन हफ्ते या उससे ज्यादा समय तक खेल से बाहर रहना पड़ सकता है क्योंकि शनिवार को सिडनी में तीसरे वनडे के दौरान हर्षित राणा की गेंद पर एलेक्स कैरी का कैच लेते समय उनकी बाईं पसली में झटका लग गया था। अभी तक यह निश्चित नहीं हो सकता है कि वह 30 नवंबर को रांची में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भारत के पहले वनडे के लिए समय पर फिट होंगे या नहीं।

श्रेयस अय्यर को लेकर बुरी खबर

इस मामले की जानकारी रखने वाले भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के एक सूत्र ने नाम नहीं बताने की शर्त पर पीटीआई को बताया, ‘श्रेयस को मैच के दौरान ही स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया था। शुरुआती जांच के अनुसार इस झटके से उन्हें कम से कम तीन हफ्ते तक खेल से बाहर रहना होगा।’

सूत्र ने कहा, ‘वापसी पर उन्हें ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में रिपोर्ट करना होगा। यह तय करने से पहले कि उन्हें ठीक होने में और समय लगेगा या नहीं, आगे की रिपोर्ट का इंतजार है। अगर यह हेयरलाइन फ्रैक्चर है तो इसमें ज्यादा समय लग सकता है।’ जब दक्षिण अफ्रीका वनडे सीरीज में उनके हिस्सा लेने के बारे में पूछा गया तो सूत्र ने जवाब दिया, ‘अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी।’

एक कैच ने कर दिया काम खराब

श्रेयस अय्यर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ तीसरे वनडे मैच में एक शानदार कैच लेते हुए चोटिल हो गए। यह घटना सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) पर मैच के 34वें ओवर की चौथी गेंद पर हुई। एलेक्स कैरी ने शॉट खेला और श्रेयस अय्यर ने पीछे से दौड़कर गेंद को लपक लिया। इस कैच से 59 रनों की साझेदारी टूटी, लेकिन अय्यर के उतरने के तरीके से उन्हें चोट लगी। वह मैदान पर दर्द में दिखे और मेडिकल टीम की मदद से मैदान से बाहर चले गए।

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साभार : नवभारत टाइम्स

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।