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क्रिसमस पर यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने यूक्रेनियनों की तरफ से की पुतिन की मृत्यु की प्रार्थना

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कीव. दुनियाभर में देर रात से क्रिसमस का त्योहार मनाना शुरू हो गया है। लोगों ने अपने, परिवार और देश के लिए खुशहाली के लिए प्रभु यीशू से प्रार्थना की। इसी बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूसी राष्ट्रपति पुतिन की मौत कामना की। जेलेंस्की ने अपने क्रिसमस संदेश में कहा कि रूसी नास्तिक हैं और सभी यूक्रेनियन की क्रिसमस पर एकमात्र इच्छा पुतिन की मृत्यु है।

जेलेंस्की ने कहा कि हम रूस द्वारा क्रिसमस के नवीनतम युद्धविराम प्रस्ताव को अस्वीकार करने पर पोप की निराशा से सहमत हैं। दुख की बात है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यूरोप में चल रहे इस भीषण युद्ध के दौरान यूक्रेनी लोगों के लिए यह चौथा क्रिसमस है जब उन्हें युद्ध का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि मॉस्को ने न केवल इस पवित्र दिन के लिए कम से कम हत्याएं रोकने के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया है, बल्कि इसके बजाय रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे बिजली गुल हो गई और मोर्चे पर हमले जारी रखे हैं।

बता दें कि यूक्रेन में ऑर्थोडॉक्स ईसाई पुराने धार्मिक कैलेंडर के अनुसार 7 जनवरी को क्रिसमस मनाते हैं, लेकिन ज़ेलेंस्की ने दो साल पहले तारीख बदल दी ताकि यह पश्चिम में मनाए जाने वाले दिन के समान हो जाए। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि दुर्भाग्यवश रूस पूरे वर्ष की तरह इस बार भी वास्तविक युद्धविराम प्रस्तावों को अस्वीकार कर रहा है। इसके बजाय वह स्पष्ट रूप से युद्ध को लंबा खींचने और हमले जारी रखने के तरीके खोज रहा है।

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शांति पर बात करते हुए जेलेंस्की ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि दुनिया भर के सभी लोग इस युद्ध के विरुद्ध आवाज उठाएं और रूस को हमारे लोगों के विरुद्ध अपनी क्रूरता, आतंक और आक्रामकता को सामान्य बनाने से रोकें। मैं सभी जिम्मेदार नेताओं से आग्रह करता हूं कि वे पोप की तरह शांति का समर्थन करें और हम एकजुटता के हर संकेत की सराहना करते हैं।

साभार : न्यूज24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।