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हंसिका लांबा और सारिका मलिक ने अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भारत की रजत पदक दिलाया

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. भारत की महिला मु्क्केबाज हंसिका लांबा और सारिका मलिक को अंडर-23 विश्व कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में हार मिली जिससे उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा। हंसिका 53 किग्रा वर्ग के खिताबी मुकाबले में जापान की हारुना मोरिकावा से 0-4 से हार गईं। पिछले साल की एशियाई अंडर-20 रजत पदक विजेता सारिका 2024 अंडर-23 विश्व रजत पदक विजेता रुका नतामी से रोमांचक मुकाबले में 1-2 से हार गईं।
भारत ने इस प्रकार महिला वर्ग में अपने अभियान का अंत सात पदकों के साथ किया। निशु (55 किग्रा), नेहा शर्मा (57 किग्रा), पुलकित (65 किग्रा), सृष्टि (68 किग्रा) और प्रिया मलिक (76 किग्रा) ने टूर्नामेंट में पहले ही कांस्य पदक जीते थे। सविता (62 किग्रा), हन्नी कुमारी (50 किग्रा), दीक्षा मलिक (72 किग्रा) का अभियान पदक दौर से पहले ही खत्म हो गया था।
पुरुषों की फ्रीस्टाइल स्पर्धा में प्रविंदर (74 किग्रा) कांस्य पदक के प्लेऑफ में जापान के योशिनोसुके आओयागी से 2-8 से हार गए। सुमित मलिक (57 किग्रा), नवीन कुमार (70 किग्रा), चंद्र मोहन (79 किग्रा) दिन में पहले ही बाहर हो गए थे, जबकि सचिन (92 किग्रा) शुक्रवार को ही बाहर हो गए थे। सुजीत कलकल 65 किग्रा भार वर्ग में अगले दो दिनों में भारत के लिए स्वर्ण पदक के लिए सबसे बड़ी उम्मीद होंगे।
साभार : अमर उजाला

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।