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श्रीलंका में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 31 की मौत, 14 अभी भी लापता

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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कोलंबो. श्रीलंका में पिछले 11 दिनों से जारी मूसलाधार बारिश, बाढ़ और विनाशकारी भूस्खलन ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) ने गुरुवार को बताया कि इन आपदाओं के कारण अब तक 31 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि लगभग 4,000 लोग प्रभावित हुए हैं।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, अकेले मध्य पर्वतीय जिलों में 18 लोगों की मौत हुई है। डेली मिरर ऑनलाइन की खबर के अनुसार एक भयावह घटना में, कुंबुक्कना में बढ़ते जलस्तर के बीच एक यात्री बस फंस गई, जिसके बाद आपात दलों ने 23 यात्रियों को सफलतापूर्वक बचा लिया। अडाडेराना समाचार पोर्टल ने बताया कि करीब 10 लोग घायल हुए हैं जबकि 14 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

बिगड़ती स्थिति की समीक्षा

राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने 25 में से 17 प्रशासनिक जिलों में बिगड़ती स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक बुलाई है। मौसम ब्यूरो के अनुसार, देश के दक्षिण पूर्व में एक निम्न दाब क्षेत्र बना, जो बाद में एक अवदाब क्षेत्र में बदल गया। ब्यूरो के अनुसार, फिलहाल वह बट्टीकलोआ से 210 किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है।

ब्यूरो ने कहा, “अगले 12 घंटे में इसके उत्तर पश्चिम की ओर बढ़ने और जोर पकड़कर गहन दबाव क्षेत्र में बदलने का प्रबल अनुमान है।” ब्यूरो ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में 200 मिलीमीटर से अधिक बारिश होने का पूर्वानुमान है।

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पिछले साल भारी बारिश के कारण आई थी बाढ़

इससे पहले, अक्टूबर 2024 में भारी बारिश के कारण राजधानी कोलंबो और उपनगरीय क्षेत्रों सहित देश के कई हिस्सों में बाढ़ आई थी। इससे 1 लाख 34 हज़ार से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। कोलंबो में स्कूलों को बंद करना पड़ा था। कुछ इलाकों में पानी घरों और दुकानों की छतों तक पहुंच गया था।

साभार : इंडिया टीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।