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मांझी के कार्यक्रम सिर्फ 15 सेकंड का भाषण देकर निकले नीतीश कुमार

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

पटना. बिहार चुनाव से पहले राज्य की सियासत लगातार सुर्खियां बटोर रही है। नीतीश कुमार के सीएम कैंडिडेट बनने पर पहले से सस्पेंस बना हुआ है। इसी बीच नीतीश कुमार के 15 सेकंड के भाषण ने बिहार की राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। जीतन राम मांझी के एक कार्यक्रम में पहुंचे नीतीश कुमार सिर्फ 15 सेकंड तक मंच से लोगों को संबंधित किया और धन्यवाद बोलकर चले गए।

पटना में दिया भाषण

दरअसल बिहार की राजधानी पटना के गांधी मैदान में दलित समागम समारोह का आगाज हुआ। यह समारोह केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तान अवाम मोर्चा (सेक्युलर) ने आयोजित किया था। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर पहुंचे। समारोह के दौरान नीतीश कुमार का भव्य स्वागत हुआ। वहीं जब मंच पर मौजूद नीतीश को कुछ बोलने के लिए कहा गया तो उन्होंने महज 15 सेकेंड का भाषण देकर सभी को चौंका दिया।

15 सेकंड में क्या बोले नीतीश?

दलित समागम समारोह के मंच से लोगों को संबोधित करते हुए नीतीश ने कहा कि मैं आप सभी लोगों का नमन करता हूं। आज पार्टी की मीटिंग हो रही है। इसके लिए सभी को बधाई। इस मीटिंग के बारे में जब हमें जानकारी मिली तो हम सबको बधाई देने आ गए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

भाषण पर उठे सवाल

नीतीश कुमार के इस 15 सेकंड के भाषण ने बिहार की सियासी हलचल बढ़ा दी है। सभी के मन में सवाल है कि नीतीश आखिर इतनी जल्दी क्यों चले गए? क्या वाकई नीतीश और बीजेपी के बीच सब ठीक है? सीएम फेस का ऐलान न करने के कारण क्या नीतीश बीजेपी से नाराज चल रहे हैं?

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क्या है असली वजह

बिहार की राजनीति में यह सुगबुगाहटें आम हो गई हैं, लेकिन हम आपको बता दें कि बेशक नीतीश का भाषण काफी छोटा था, लेकिन वो इस कार्यक्रम के दौरान 10 मिनट तक मंच पर मौजूद रहे। नीतीश के साथ उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय चौधरी ने भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बने थे। खबरों की मानें तो नीतीश को विधानसभा सत्र पहुंचना था, जिसके कारण वो जल्दी लौट गए।

साभार : न्यूज़24

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।