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फिल्म ‘रामायण’ में विभीषण बने अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने दान की अपनी फीस

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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मुंबई. बॉलीवुड एक्टर विवेक ओबेरॉय रियल स्टेट का बिजनेस कर रहे हैं. हालांकि वह नितेश तिवारी की ‘रामायण’ का भी हिस्सा हैं और उसमें रावण के छोटे भाई विभीषण की भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 4000 करोड़ की इस फिल्म में उन्हें जो भी फीस मिलने वाली थी, उसे उन्होंने डोनेट कर दिया. उनका मानना है कि इस फिल्म के जरिए नमित मल्होत्रा और नितेश तिवारी इंडियन सिनेमा को ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर ले जा रहे हैं.

4000 करोड़ की रामायण में विभीषण बनेंगे

विवेक ने कहा कि यह फिल्म भारत का हॉलीवुड की बड़ी एपिक फिल्मों को जवाब होगी. रणबीर कपूर राम, साई पल्लवी सीता और यश रावण की भूमिका में होंगे. पहला भाग दिवाली 2026 में रिलीज होगा. सबसे खास बात यह है कि विवेक ओबेरॉई अपनी पूरी फीस दान कर देंगे. वे इसे कैंसर से जूझ रहे बच्चों की मदद के लिए देंगे. उन्होंने कहा, ‘रामायण जैसी पवित्र कहानी में काम करना सम्मान की बात है. मैं अपनी फीस कैंसर पीड़ित बच्चों के इलाज में लगाना चाहता हूं.’ यह दान उनकी चैरिटी फाउंडेशन के जरिए होगा. विवेक पहले भी कई सामाजिक कामों में सक्रिय रहे हैं.

पूरी फीस कैंसर पीड़ित बच्चों को दान

फिल्म की शूटिंग जल्द शुरू होगी और यह दुनिया भर में रिलीज होगी. हॉलीवुड लेवल के वीएफएक्स और ग्रैंड सेट्स का इस्तेमाल होगा. विवेक का कहना है कि यह सिर्फ फिल्म नहीं, भारत की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का मिशन है.

विवेक ओबेरॉय ने आगे कहा, ‘रामायण, हॉलीवुड महाकाव्यों के लिए भारत का जवाब होगा. ये मदद करता है कि वो ऐसी कंपनी से जुड़े हैं, जिसने VFX में 8 ऑस्कर जीते हैं. और पहले भी कई शानदार काम किए हैं. वास्तव में रामायण से बेहतर और बड़ा कुछ और नहीं हो सकता. इसे ग्लोबल फील्ड में ले जाना काफी एक्साइटिंग है.’ उन्होंने कहा कि रामायण ऐतिहासिक है या फिर पौराणिक, इस पर हमेशा बहस होती रही है और टीम का यकीन है कि ये ऐतिहासिक है. उन्होंने कहा कि फिल्म पर काम करने का अनुभव अच्छा रहा. उन्हें सभी के साथ काम करके मजा आया.

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साभार : जी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।