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श्रेयस अय्यर चोट के कारण दक्षिण अफ्रीका दौरे पर भारतीय टीम से हुए बाहर

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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नई दिल्ली. टीम इंडिया के भरोसेमंद बल्लेबाज श्रेयस अय्यर के फैंस के लिए बुरी खबर है. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सिडनी में खेले गए तीसरे वनडे मैच में चोटिल हुए अय्यर अब कम से कम दो महीने तक मैदान से दूर रहेंगे. रेवस्पोर्ट्ज की रिपोर्ट के मुताबिक, अय्यर को पूरी तरह फिट होकर वापसी करने में करीब आठ हफ्ते का समय लग सकता है. इसका मतलब है कि वह न सिर्फ दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज, बल्कि न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में होने वाली वनडे सीरीज से भी बाहर रह सकते हैं.

कैच लेते वक्त लगी गंभीर चोट

25 अक्टूबर को सिडनी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तीसरे वनडे के दौरान श्रेयस अय्यर फील्डिंग कर रहे थे. मैच के दौरान उन्होंने एलेक्स कैरी का कैच पकड़ने के लिए डाइव लगाई, लेकिन इसी दौरान उनके पेट में गंभीर चोट लग गई. शुरुआत में यह सामान्य लगी, लेकिन बाद में उनकी हालत बिगड़ती गई. तुरंत उन्हें सिडनी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद पता लगाया कि अय्यर की तिल्ली (spleen) में चोट आई है और आंतरिक रक्तस्राव (internal bleeding) हुआ है.

हो चुकी है मेडिकल सर्जरी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रेयस अय्यर को इंटरवेंशनल ट्रांस-कैथेटर एम्बोलाइजेशन (TCE) नाम की प्रक्रिया से गुजरना पड़ा. यह एक मेडिकल प्रोसिजर है जिसमें धमनी में एक पतली ट्यूब डालकर रक्तस्राव को रोका जाता है. यह सर्जरी इमेज कंट्रोल के तहत की जाती है ताकि शरीर में किसी और हिस्से पर असर न पड़े. डॉक्टरों की मेहनत और तेज इलाज के चलते अब अय्यर की हालत स्थिर बताई जा रही है.

BCCI ने दी अपडेट

28 अक्टूबर को बीसीसीआई ने उनकी चोट पर बयान जारी करते हुए कहा, “श्रेयस अय्यर को 25 अक्टूबर को तीसरे वनडे के दौरान पेट में गंभीर चोट लगी थी. उनकी चोट की तुरंत पहचान कर ली गई और रक्तस्राव रोकने का इलाज सफलतापूर्वक कर लिया गया है. उनकी हालत अब बेहतर है और उन्हें डॉक्टरों की देख-रेख में रखा गया है.” बीसीसीआई ने यह भी बताया कि उनकी मेडिकल टीम सिडनी और भारत के विशेषज्ञों के संपर्क में है और श्रेयस की रिकवरी पर लगातार नजर रखी जा रही है.

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साभार : एबीपी न्यूज

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।