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अनंत सिंह के समर्थकों पर लगा जन सुराज समर्थक की गोली मारकर हत्या करने का आरोप

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार में चुनाव से कुछ दिन पहले जनसुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थक की हत्या कर दी गई है. घटना बिहार के मोकामा की बताई जा रही है. इस हत्या के लिए NDA प्रत्याशी अनंत सिंह को जिम्मेदार बताया जा रहा है. इस हमले में पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में उनके काफिले के साथ चल रहे उनके एक समर्थक दुलारचंद यादव की गोली मारकर हत्या कर दी गई है.

पुलिस सूत्रों के अनुसार जनसुराज से जुड़े अन्य नेताओं ने पुलिस को बताया है कि हमारे उम्मीदवार का काफिला अनंत सिंह की गाड़ी के पीछे था. इसी दौरान अचानक अनंत सिंह के समर्थक गाड़ियों से निकले और उनपर हमला बोल दिया.ये घटना मोकामा के घोसवरी की है. वहीं, एक अन्य शख्स ने पुलिस को बताया कि जब पीयूष प्रियदर्शी की गाड़ियों का काफिल अनंत सिंह के काफिले के पास गुजरा तो अनंत सिंह के लोगों ने एकाएक हमला कर दिया.

मौके पर मौजूद एक अन्य शख्स ने बताया कि हम लोग पीयूष प्रियदर्शी के काफिले के 10 गाड़ी के पीछे थे. सामने से अनंत सिंह का काफिला आ रहा था। दोनों काफिले गुजरे तो अनंत सिंह के समर्थकों ने प्रियदर्शी की गाड़ी पर हमला किया।

गाड़ी का कांच तोड़ दिया, लाठी-डंडों से तोड़फोड़ भी की. ये एक तरह से जानलेवा हमला था. इसके बाद भगदड़ मच गई.  कई गाड़ियों के शीशे तोड़े गए. पुलिस फिलहाल इन तमाम आरोपों की जांच कर रही है.

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“सभी आरोप झूठे”

जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार के समर्थक  की हत्या के बाद आरोपों के घेरे में आए पूर्व विधायक अनंत सिंह ने अपने ऊपर लगे आरोपों को गलत बताया है. उन्होंने कहा कि वह अपने समर्थकों के साथ क्षेत्र में गए थे,जहां कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके खिलाफ नारेबाजी और गाली-गलौज शुरू कर दी. इसके बावजूद उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और वहां से निकल गए.

अनंत सिंह ने दावा किया कि घटना के समय वहां मौजूद लोगों के पास पहले से हथियार थे. और यह पूरी रणनीति राजद नेता सूरजभान सिंह के द्वारा रची गई थी, ताकि वोटों को डिस्टर्ब किया जा सके. उन्होंने कहा कि इस घटना में उनके कई समर्थक घायल हुए हैं और उनकी गाड़ी भी क्षतिग्रस्त हुई है.

साभार : एनडीटीवी

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।