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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन, राजनीतिक युग का अंत

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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ढाका: बांग्लादेश की राजनीति का एक बड़ा अध्याय आज समाप्त हो गया। बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) की अध्यक्ष बेगम खालिदा जिया का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया है। वह 80 वर्ष की थीं।

प्रमुख विवरण:

  • निधन का स्थान: ढाका स्थित एवरकेयर अस्पताल।

  • स्वास्थ्य स्थिति: वह लंबे समय से लीवर सिरोसिस, मधुमेह, हृदय रोग और किडनी की समस्याओं से जूझ रही थीं।

  • राजनीतिक विरासत: वह बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं और उन्होंने तीन बार देश का नेतृत्व किया।

राजनीतिक सफर पर एक नजर

खालिदा जिया का जन्म 1945 में हुआ था। उनके पति, पूर्व राष्ट्रपति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने राजनीति में कदम रखा। उन्हें बांग्लादेश की राजनीति में ‘अपोजीन बंगाबंधु’ (अजेय राजनेता) के रूप में जाना जाता था। उन्होंने 1991, 1996 और 2001 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

देश में शोक की लहर

उनके निधन की खबर मिलते ही ढाका सहित पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। BNP के समर्थकों और नेताओं की भारी भीड़ अस्पताल के बाहर जमा होने लगी है। वर्तमान अंतरिम सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है और इसे देश के लिए एक अपूरणीय क्षति बताया है।

अंतिम संस्कार

पार्टी सूत्रों के अनुसार, उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए उनके आवास पर रखा जाएगा। उनके अंतिम संस्कार (जनाज़ा) के विवरण की घोषणा जल्द ही की जाएगी, जिसमें देश-विदेश के कई बड़े नेताओं के शामिल होने की संभावना है।

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।