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बिहार के मोकामा में जन सुराज पार्टी समर्थक दुलारचंद यादव की शव यात्रा के दौरान चली गोली, हुई पत्थरबाजी

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना. बिहार चुनाव से पहले मोकामा विधानसभा सीट चर्चा में आ गई है. बाहुबली दुलारचंद हत्याकांड में एक बार फिर से भारी बवाल की जानकारी मिल रही है. जानकारी के मुताबिक, पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाते वक्त भी भारी बवाल हो गया. पंडारक में शव यात्रा पर पथराव और गोलीबारी किए जाने की खबर सामने आई है. दुलारचंद के समर्थकों ने दूसरे पक्ष यानी अनंत सिंह और उनके समर्थकों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया है. बताया जा रहा है कि पंडारक में शवयात्रा पर पथराव हुआ है. शव का ट्रैक्टर आगे निकल गया और समर्थकों का काफिला छूट गया. समर्थकों के काफिले पर ईंट-पत्थर से हमला हुआ. इस घटना में कई गाड़ियों के शीशे टूटने की बात कही जा रही है.

बता दें कि मोकामा टाल इलाके में गुरुवार (30 अक्टूबर) की शाम को जन सुराज प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी और जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थक आपस में भिड़ गए. इस दौरान कई राउंड फायरिंग हुई, जिसमें बाहुबली दुलारचंद यादव मारे गए. दुलारचंद यादव की हत्या की खबर मिलते ही इलाके के आसपास के दर्जनों गांव के लोग सड़क पर उतर आए. पूरे इलाके में भारी पुलिस फोर्स तैनात है. अनंत सिंह समेत 5 लोगों पर नामजद मुकदमा दर्ज किए जाने के दुलारचंद का परिवार पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हुआ. पोस्टमार्टम के लिए शव ले जाते वक्त भी भारी बवाल हो गया.

दुलारचंद हत्याकांड में पुलिस ने जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह, विवेका पहलवान के दोनों भतीजे कर्मवीर और राजबीर, अनंत सिंह के करीबी कंजय सिंह और छोटन सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. केस में कुछ अज्ञात लोगों का भी नाम जोड़ा गया है. ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग ने केस के संबंध में जानकारी दी. उधर इस हत्याकांड से बिहार की सियासत काफी गरमा गई है. विपक्ष ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. तो वहीं मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि फिर से हमारी सरकार बन रही है और तब इस मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी. उन्होंने कहा कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी. विपक्ष पर निशाना साधते हुए मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि दूसरे के घरों मे झांकने से पहलेअपने गिरेबान मे झांके.

साभार : जी न्यूज

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यह भी पढ़ें : 1857 का स्वातंत्र्य समर : कारण से परिणाम तक

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।