मंगलवार, जनवरी 20 2026 | 12:57:47 PM
Breaking News
Home / अंतर्राष्ट्रीय / ट्रंप के बाद अब चीन का बड़ा दावा: “हमने रुकवाया भारत-पाकिस्तान संघर्ष”

ट्रंप के बाद अब चीन का बड़ा दावा: “हमने रुकवाया भारत-पाकिस्तान संघर्ष”

Follow us on:

नई दिल्ली. अमेरिका के बाद अब चीन ने भी भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को शांत कराने का श्रेय लेने की कोशिश की है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बीजिंग में एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दावा किया कि इस वर्ष चीन ने कई वैश्विक विवादों के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई है।

चीन का दावा: विदेश मंत्री वांग यी ने ‘हॉटस्पॉट’ मुद्दों की अपनी सूची में भारत-पाक तनाव को शामिल करते हुए कहा कि चीन ने “निष्पक्ष और न्यायसंगत रुख” अपनाते हुए दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की।

ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ: यह दावा मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के संदर्भ में किया गया है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच चार दिनों तक तीव्र संघर्ष चला था।

भारत का रुख: भारत ने चीन के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, 10 मई को हुआ युद्धविराम दोनों देशों के DGMO (सैन्य अभियान महानिदेशक) के बीच सीधी बातचीत का परिणाम था, न कि किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का।

क्रेडिट की होड़: चीन से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कई बार दावा कर चुके हैं कि उनके हस्तक्षेप के कारण ही भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध टला था।

चीन पर उठते सवाल

भारतीय अधिकारियों और विशेषज्ञों ने चीनी दावे को “अजीब” बताया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान को सैन्य साजो-सामान और खुफिया जानकारी प्रदान की थी। ऐसे में चीन द्वारा ‘शांतिदूत’ बनने के दावे पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है और दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ कोई भी मुद्दा पूरी तरह से द्विपक्षीय है।

भारत सरकार की कड़ी प्रतिक्रिया

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने बीजिंग के दावों को “तथ्यों से परे और भ्रामक” करार दिया है। भारत की प्रतिक्रिया के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

द्विपक्षीय तंत्र का सम्मान: भारत ने दोहराया कि पाकिस्तान के साथ सभी मुद्दों का समाधान ‘शिमला समझौते’ और ‘लाहौर घोषणापत्र’ के तहत केवल द्विपक्षीय (Bilateral) तरीके से ही होगा।

मध्यस्थता की गुंजाइश नहीं: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, “हमने कभी भी चीन या किसी अन्य देश से हस्तक्षेप करने का अनुरोध नहीं किया। युद्धविराम का निर्णय विशुद्ध रूप से सैन्य कमांडरों के बीच जमीनी हकीकत को देखते हुए लिया गया था।”

चीन की भूमिका पर सवाल: भारत ने संकेत दिया कि संघर्ष के दौरान चीन के ड्रोन और सैटेलाइट डेटा पाकिस्तान की मदद कर रहे थे, इसलिए चीन का ‘मध्यस्थ’ होने का दावा विरोधाभासी है।

क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’? (मई 2025)

यह संघर्ष हाल के वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच हुआ सबसे गंभीर सैन्य टकराव माना जाता है:

शुरुआत: 6 मई 2025 को पहलगाम में हुए एक बड़े आतंकी हमले के बाद भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया।

कार्रवाई: भारतीय वायुसेना और थल सेना ने नियंत्रण रेखा (LoC) के पार आतंकी लॉन्च पैड्स पर सटीक हमले (Precision Strikes) किए।

तनाव का स्तर: चार दिनों तक दोनों ओर से भारी गोलाबारी हुई, जिसमें आधुनिक तकनीक और लंबी दूरी की मिसाइलों का भी उपयोग देखा गया।

युद्धविराम: 10 मई 2025 को सुबह 11:00 बजे दोनों देशों के DGMO के बीच ‘हॉटलाइन’ पर बातचीत हुई, जिसके बाद गोलीबारी रुकी।

चीन आखिर ऐसा दावा क्यों कर रहा है?

विशेषज्ञों के अनुसार, चीन के इस दावे के पीछे तीन मुख्य कारण हो सकते हैं:

ग्लोबल लीडर की छवि: चीन खुद को अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) के मुकाबले एक बेहतर ‘शांति निर्माता’ के रूप में पेश करना चाहता है।

CPEC की सुरक्षा: पाकिस्तान में चीन का अरबों डॉलर का निवेश (CPEC) लगा हुआ है। वह यह दिखाना चाहता है कि क्षेत्र की स्थिरता उसके नियंत्रण में है।

भारत पर दबाव: एलएसी (LAC) पर जारी तनाव के बीच भारत को कूटनीतिक रूप से घेरने की एक कोशिश।

मित्रों,
मातृभूमि समाचार का उद्देश्य मीडिया जगत का ऐसा उपकरण बनाना है, जिसके माध्यम से हम व्यवसायिक मीडिया जगत और पत्रकारिता के सिद्धांतों में समन्वय स्थापित कर सकें। इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए हमें आपका सहयोग चाहिए है। कृपया इस हेतु हमें दान देकर सहयोग प्रदान करने की कृपा करें। हमें दान करने के लिए निम्न लिंक पर क्लिक करें -- Click Here


* 1 माह के लिए Rs 1000.00 / 1 वर्ष के लिए Rs 10,000.00

Contact us

Check Also

ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात: 15,000 से ज्यादा की मौत, भारत ने शुरू किया ‘ऑपरेशन स्वदेश’; जानें लेटेस्ट अपडेट

तेहरान. ईरान इस समय अपने आधुनिक इतिहास के सबसे बड़े जन-आक्रोश और गृहयुद्ध जैसी स्थिति …