गुरु रविदास जयंती (Magh Purnima) पूरे भारत में भक्ति, समानता और सामाजिक समरसता के महान संदेश के साथ मनाई जा रही है। 2026 में भी यह त्यौहार सामाजिक चेतना और मानवता की एकता का प्रतीक बनकर उभरा है।
गुरु रविदास कौन थे? — जीवनी और प्रारंभिक जीवन
गुरु रविदास का जन्म वाराणसी के पास सीर-गोवर्धनपुर गाँव में हुआ था। उनके पिता श्री संतोख दास और माता श्रीमती कलसा देवी थीं। वे एक साधारण चर्मकार (जूते बनाने वाले) परिवार से थे। परंतु जन्माने वाली पृष्ठभूमि के बावजूद उनके विचार अत्यंत महान और आध्यात्मिक थे।
वे शिक्षा और ज्ञान के ऐसे प्रकाशपुंज बने जिन्होंने समाज में व्यापक बदलाब की राह बनाई।
माघ पूर्णिमा और जयंती का पर्व
गुरु रविदास जयंती माघ पूर्णिमा के दिन आती है, जो हिन्दू पंचांग के अनुसार पवित्र मानी जाती है। इस दिन भक्त उनके आदर्शों को याद करते हैं और उनके विचारों से प्रेरणा लेते हैं।
🌕 माघ पूर्णिमा को भारतीय संस्कृति में अत्यंत शुभ और समृद्धि देने वाला दिन माना जाता है।
गुरु रविदास के प्रमुख विचार और दर्शन
गुरु रविदास के संदेश सरल लेकिन गहरे रहे हैं। उनके मुख्य दर्शन निम्नलिखित हैं:
✦ 1. “मन चंगा तो कठौती में गंगा”
उन्होंने यह स्पष्ट किया कि बाहरी पूजा-पाठ और तीर्थों की अपेक्षा ईश्वर की सच्ची भक्ति मन के शुद्ध होने में है।
➡️ यह संदेश आज भी धार्मिक इंटरनेट सर्च और भक्ति-कथाओं में अत्यंत लोकप्रिय है।
✦ 2. मानवता की सर्वोच्चता
गुरु रविदास ने जात-पात, वर्ण-भेद और छुआछूत का कड़ा विरोध किया। उनका मानना था कि:
- असली महानता जन्म से नहीं,
- बल्कि कर्मों और आचार से आती है।
✦ 3. बेगमपुरा — आदर्श समाज की कल्पना
“बेगमपुरा” उनका एक आदर्श समाज का रूप था जिसमें:
- कोई भेदभाव नहीं,
- कोई दुख नहीं,
- कोई गरीबी नहीं,
- कोई भेदभाव-आधारित अन्याय नहीं।
यह विचार आज के समय में सामाजिक न्याय, रोज़गार समानता और मानवाधिकारों के संदर्भ में अत्यंत प्रासंगिक है।
भक्ति साहित्य में गुरु रविदास का योगदान
गुरु रविदास ने अपने पदों (भजन, शबद) में ईश्वर-भक्ति की विविध रूपों को उजागर किया।
📌 उनकी वाणी इतनी प्रेरणादायक थी कि:
- चित्तौड़ की प्रसिद्ध भक्ति संत मीराबाई ने उन्हें अपना गुरु माना।
- उनके ४१ पदों को सिख धर्म के पवित्र ग्रंथ गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल किया गया।
ये पद आज भी भक्ति संगीत, धार्मिक प्रवचन और गुरु रविदास सेमिनार में गाये और उद्धृत होते हैं।
जयंती 2026 में क्यों खास है?
आज का समय (2026) हमारे समाज के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि:
✔ वैश्विक दौर में बढ़ती असमानता और संघर्ष की चुनौती
✔ भारत में सामाजिक समरसता की आवश्यकता
✔ युवा पीढ़ी में चेतना और भक्ति की तलाश
✔ डिजिटल मीडिया पर गुरु रविदास के विचारों का बढ़ता प्रभाव
इन कारणों की वजह से गुरु रविदास जयंती 2026 केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं—बल्कि एक सामाजिक जागरण दिवस बनकर उभरी है।
गुरु रविदास के अमर विचार (Quotes)
📌 “जाति-जाति में जाति हैं, जो केतन के पात…”
→ अर्थात् जब तक जाति-भेद रहेगा, मानवता की पूर्ण एकता असम्भव है।
📌 “मन के भाव जैसा, वैसा संसार।”
→ यह संदेश सकारात्मक सोच और समानता की ओर प्रेरित करता है।
समकालीन समाज में गुरु रविदास का संदेश
आज हम:
✔ सामाजिक भेदभाव को चुनौती दे सकते हैं
✔ समानता, शिक्षा और रोजगार के समान अवसर दे सकते हैं
✔ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भक्ति की आदर्श कहानी को फैलाकर समरसता को बढ़ावा दे सकते हैं
गुरु रविदास का संदेश समग्र मानवीय समाज के लिए प्रासंगिक और भविष्य-उन्मुख है।
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