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यूपी में आवारा कुत्तों से मिलेगी मुक्ति: ₹5 करोड़ की लागत से बन रहे हाई-टेक शेल्टर होम्स, जानें पूरी योजना

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यूपी सरकार - आधुनिक डॉग शेल्टर होम और नसबंदी केंद्र

उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी और डॉग बाइट की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए एक व्यापक, वैज्ञानिक और मानवीय योजना को जमीन पर उतारना शुरू कर दिया है। योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी नगर निगमों और जिला मुख्यालयों में आधुनिक डॉग शेल्टर होम्स और एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) सेंटर्स स्थापित किए जा रहे हैं।

यह पहल केवल कानून-व्यवस्था या सफाई से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि जन सुरक्षा, पशु कल्याण और रेबीज-मुक्त उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की ओर एक निर्णायक प्रयास है।

परियोजना का उद्देश्य: सुरक्षा और संवेदनशीलता का संतुलन

सरकार की इस योजना के दो प्रमुख स्तंभ हैं:

  • जन सुरक्षा: डॉग बाइट की घटनाओं में प्रभावी कमी, खासकर स्कूलों, अस्पतालों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में।
  • पशु कल्याण: आवारा कुत्तों को सुरक्षित आश्रय, नियमित चिकित्सा, टीकाकरण और पर्याप्त भोजन।

नवीनतम रणनीति के तहत कैच–न्यूटर–वैक्सीनेट–रिलीज (CNVR) मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आबादी नियंत्रण के साथ कुत्तों के स्वभाव में भी आक्रामकता कम होती है।

डॉग शेल्टर होम्स: लागत, सुविधाएं और एकीकृत मॉडल

राज्य सरकार ने प्रत्येक शेल्टर होम के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की है।

  • अनुमानित लागत: ₹4.70 करोड़ से ₹5.31 करोड़ प्रति शेल्टर
  • प्रमुख सुविधाएं:
    • अत्याधुनिक पशु चिकित्सा इकाई और ऑपरेशन थिएटर
    • प्रशिक्षित पशु चिकित्सक व पैरावेट स्टाफ
    • स्वच्छता, सुरक्षा और निगरानी की आधुनिक व्यवस्था
  • एकीकृत व्यवस्था: अधिकांश शेल्टर होम्स को ABC सेंटर्स के साथ विकसित किया जा रहा है, ताकि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों की देखभाल वहीं हो सके।

यह मॉडल न केवल लागत-प्रभावी है, बल्कि उपचार के बाद कुत्तों की रिकवरी और मॉनिटरिंग को भी बेहतर बनाता है।

भूमि चिह्नीकरण की प्रगति: प्रमुख जिले

प्रदेश के कई जिलों में शेल्टर निर्माण के लिए भूमि चिह्नित की जा चुकी है:

जिला भूमि का विवरण
प्रयागराज तहसील सोरांव, ग्राम मऊर उपरहट
लखनऊ नगर निगम कार्यकारिणी बोर्ड से भूमि प्रस्ताव स्वीकृत
ललितपुर 12.182 हेक्टेयर (राज्य में सर्वाधिक)
फतेहपुर 0.769 हेक्टेयर
बुलंदशहर 2000 वर्ग मीटर
हरदोई 0.2 हेक्टेयर

इन जिलों को पायलट मॉडल के रूप में विकसित कर अन्य शहरों में भी इसी तर्ज पर परियोजना लागू की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस और नसबंदी लक्ष्य

यह पूरी पहल सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप संचालित की जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि हिंसक, बीमार या रेबीज-संदिग्ध कुत्तों को सार्वजनिक स्थलों से हटाकर शेल्टर में रखा जाए।

  • ABC लक्ष्य: प्रदेश में 8 लाख से अधिक कुत्तों की नसबंदी का चरणबद्ध लक्ष्य
  • टीकाकरण: रेबीज वैक्सीन के साथ वार्षिक बूस्टर डोज़
  • डिजिटल ट्रैकिंग: आवारा कुत्तों की पहचान और रिकॉर्ड के लिए डेटा-आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम

नई रणनीतियां: नो-डॉग जोन से फीडिंग पॉइंट्स तक

सरकार ने आने वाले महीनों के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया है:

  • हाई-रिस्क जोन: एक्सप्रेसवे, हाईवे, अस्पताल और शिक्षण संस्थान विशेष प्रबंधन/नो-डॉग जोन के रूप में
  • डॉग फीडिंग पॉइंट्स: शहरों में निर्धारित स्थान, ताकि रिहायशी इलाकों में टकराव न हो
  • जवाबदेही तय: आवारा पशु प्रबंधन में लापरवाही पर संबंधित अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश सरकार की यह योजना तात्कालिक समाधान से आगे बढ़कर दीर्घकालिक, वैज्ञानिक और मानवीय मॉडल प्रस्तुत करती है। डॉग शेल्टर होम्स और ABC सेंटर्स के माध्यम से न केवल डॉग बाइट और रेबीज पर नियंत्रण संभव होगा, बल्कि मानव–पशु सहअस्तित्व का संतुलित उदाहरण भी स्थापित होगा।

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