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देहरादून: बसंत विहार में धर्म प्रचार को लेकर हंगामा, दो महिलाएँ पुलिस हिरासत में

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
3 Min Read

देहरादून | शुक्रवार, 1 मई 2026 

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के बसंत विहार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कांवली माड़ी इलाके में उस समय तनाव की स्थिति पैदा हो गई, जब स्थानीय निवासियों ने दो महिलाओं पर घर-घर जाकर ईसाई धर्म का प्रचार करने और हिंदू महिलाओं को कथित प्रलोभन देने का आरोप लगाया।

पकड़ी गई महिलाओं की पहचान सीतापुरी (निवासी बनियावाला) और सुमित्रा (निवासी कांवली गांव) के रूप में हुई है। स्थानीय निवासी दीपक कुमार ने जब इन महिलाओं को संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त देखा, तो उन्होंने तुरंत ‘वीर सावरकर संगठन’ के कार्यकर्ता इंद्रजीत को इसकी सूचना दी।

घटनाक्रम और पुलिस की कार्रवाई

सूचना मिलते ही संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे। बताया जा रहा है कि उस समय महिलाएँ लोगों को ईसाई धर्म अपनाने के कथित फायदों के बारे में बता रही थीं। स्थिति को देखते हुए तुरंत 112 नंबर पर पुलिस को सूचित किया गया।

हालांकि, पुलिस के पहुँचने से पहले ही महिलाएँ वहां से निकल चुकी थीं, लेकिन पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए विकास मॉल क्षेत्र के पास से दोनों को हिरासत में ले लिया। वर्तमान में दोनों से बसंत विहार थाने में पूछताछ की जा रही है।

कानूनी पहलू 

अक्सर ऐसे मामलों में अफवाहें और तथ्य आपस में मिल जाते हैं। यहाँ वर्तमान स्थिति के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण सुधार और स्पष्टीकरण दिए गए हैं:

  • पुष्टि का अभाव: फिलहाल पुलिस ने महिलाओं पर “जबरन धर्मांतरण” की पुष्टि नहीं की है। जांच इस बात पर टिकी है कि क्या वास्तव में कोई आर्थिक या अन्य प्रलोभन दिया गया था।

  • कानूनी मांग: वीर सावरकर संगठन के अध्यक्ष कुलदीप स्वेडिया ने मांग की है कि महिलाओं पर ‘उत्तराखंड धर्म स्वतंत्रता (संशोधन) अधिनियम’ के तहत कार्रवाई हो। इस कानून के तहत उत्तराखंड में जबरन या लालच देकर कराया गया धर्मांतरण एक गंभीर संज्ञेय अपराध है।

  • पुलिस का पक्ष: थाना प्रभारी शेंकी कुमार ने स्पष्ट किया है कि “दोनों पक्षों से पूछताछ की जा रही है। बिना ठोस सबूत और जांच के कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा।”

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।