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कोलकाता धरना: ममता बनर्जी के मंच पर क्यों सिमटी तृणमूल? विधायकों और सांसदों में से केवल चुनिंदा चेहरे ही दिखे साथ

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कोलकाता के एस्प्लेनेड में धरना मंच पर बैठीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी और उनके साथ मौजूद वरिष्ठ पार्टी नेता।

कोलकाता । मंगलवार, 2 जून 2026

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आया हुआ है। कोलकाता के एस्प्लेनेड (वाई-चैनल) में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जी ने चुनाव के बाद अपने कार्यकर्ताओं पर कथित हमलों और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के विरोध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन शुरू किया है। हालांकि, इस धरने में सबसे ज्यादा चर्चा विरोध प्रदर्शन से कहीं ज्यादा मंच पर पार्टी के नेताओं की ‘कम उपस्थिति’ को लेकर हो रही है।

हालिया अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास अभी भी 78 विधायक (MLAs) हैं और लोकसभा व राज्यसभा को मिलाकर कुल 41 सांसद (MPs) हैं। लेकिन इस बड़े संख्याबल के बावजूद, धरने के मुख्य मंच पर ममता बनर्जी के बगल में केवल 5 सांसद और गिने-चुने विधायक ही नजर आए।

🚫 अंदरूनी कलह और दो विधायकों का निष्कासन

इस धरने से ठीक एक दिन पहले, 1 जून 2026 को तृणमूल कांग्रेस ने एक कड़ा फैसला लेते हुए अपने दो प्रमुख विधायकों—एंटली से विधायक संदीपन साहा और उलुबेरिया पूर्व से विधायक ऋतब्रत बनर्जी—को 6 साल के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया।

ताजा राजनीतिक घटनाक्रम: पूर्व में यह कयास लगाए जा रहे थे कि यह निष्कासन सामान्य है, लेकिन असल विवाद विधानसभा में विपक्ष के नेता (LoP) के नामांकन पत्र पर ‘फर्जी हस्ताक्षर’ (Forged Signatures) से जुड़ा है। इन दोनों विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) से लिखित शिकायत की थी कि शोभनदेव चटर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने वाले टीएमसी के पत्र पर उनके जाली दस्तखत किए गए थे। इस शिकायत के तुरंत बाद टीएमसी उपाध्यक्ष चंद्रिमा भट्टाचार्य द्वारा दोनों को निष्कासित कर दिया गया।

इस कार्रवाई के बाद टीएमसी विधायकों की प्रभावी संख्या घटकर 78 रह गई है। इस अंदरूनी उठापटक के बीच हुए धरने में केवल पुराने और वफादार चेहरों को ही मंच पर जगह दी गई।

👥 ममता बनर्जी के धरना मंच पर कौन-कौन रहा मौजूद?

मंच की पूरी रूपरेखा को देखें तो वहां केवल ममता बनर्जी के बेहद करीबी और वरिष्ठ रणनीतिकार ही डटे दिखाई दिए:

श्रेणी (Category) मंच पर मौजूद प्रमुख नेता (TMC Leaders Present)
सांसद (MPs) डेरेक ओ’ब्रायन, समीरुल इस्लाम, दोला सेन, माला रॉय और कल्याण बनर्जी (कुल 5 सांसद)।
विधायक (MLAs) बिमान बनर्जी (विधानसभा अध्यक्ष), फरहाद हकीम (कोलकाता मेयर), शोभनदेव चटर्जी, मदन मित्रा, नयना दास बनर्जी और अशोक देव।
वरिष्ठ नेता / पराजित उम्मीदवार चंद्रिमा भट्टाचार्य, अखिल गिरी और तन्मय घोष।
नगर पालिका प्रतिनिधि वैश्वानर चटर्जी, कृष्ण चक्रवर्ती और स्वपन समद्दार।

🔍 राजनीतिक विश्लेषकों की नजर: ‘ओल्ड गार्ड्स’ बनाम ‘न्यू फेसेस’

कोलकाता पुलिस द्वारा लाउडस्पीकर और मंच बनाने की अनुमति न दिए जाने के कारण ममता बनर्जी ने मेगाफोन (Megaphone) से ही कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नए चुने गए कई विधायकों और सांसदों की मंच से अनुपस्थिति यह संकेत देती है कि हालिया चुनावी हार और सिग्नेचर विवाद के बाद ममता बनर्जी केवल अपने ‘ओल्ड गार्ड्स’ (पुराने सिपहसालारों) पर ही भरोसा जता रही हैं। दूसरी ओर, राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले पर तंज कसते हुए कहा है कि टीएमसी के भीतर की यह दरार कानून के दायरे में सुलझाई जाएगी।

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