कानपुर । बुधवार, 2 सितंबर 2026
उत्तर प्रदेश के बिजली विभाग की हालिया समीक्षा रिपोर्ट ने राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था में एक गंभीर ढांचागत संकट को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के करीब 62 प्रतिशत बिजली फीडर घाटे में चल रहे हैं।
फीडर बिजली उपकेंद्रों (Substations) से विभिन्न क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने वाली प्राथमिक वितरण लाइनें होती हैं। किसी भी फीडर के प्रदर्शन का आकलन आपूर्ति की गई बिजली, कुल खपत, तकनीकी लाइन लॉस और राजस्व वसूली के आंकड़ों की तुलना करके किया जाता है। इतने बड़े पैमाने पर फीडरों का घाटे में होना राज्य की बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) के लिए चिंता का बड़ा कारण बना हुआ है।
घाटे और नुकसान के प्रमुख कारण
बिजली वितरण कंपनियों को अपेक्षित राजस्व न मिलने और वित्तीय नुकसान बढ़ने के पीछे कई मुख्य कारक जिम्मेदार हैं:
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तकनीकी एवं व्यावसायिक हानि (AT&C Loss): जर्जर वितरण लाइनों, पुराने ट्रांसफार्मर और लंबी दूरी की तारों के कारण बड़ी मात्रा में बिजली आपूर्ति के दौरान ही व्यर्थ हो जाती है।
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बिजली चोरी (Power Theft): कई शहरी और ग्रामीण इलाकों में कटिया लगाना, मीटर से छेड़छाड़ करना और अनधिकृत कनेक्शनों का संचालन फीडर लॉस को सीधे बढ़ाता है।
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कम बिलिंग और बकाया भुगतान: शत-प्रतिशत उपभोक्ताओं तक समय पर और सटीक बिल न पहुंचना तथा बकायेदारों से समय पर वसूली न हो पाना राजस्व घाटे को गहरा करता है।
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रखरखाव में कमी: उपकरणों की समय पर मरम्मत न होने से तकनीकी खराबी की दर अधिक रहती है।
सुधार के लिए महत्वपूर्ण और प्रभावी कदम
62% घाटे वाले फीडरों की स्थिति में सुधार के लिए बिजली विभाग को बहुस्तरीय रणनीति अपनानी होगी:
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स्मार्ट और प्री-पेड मीटरिंग का विस्तार: घाटे वाले क्षेत्रों में प्राथमिकता के आधार पर स्मार्ट मीटर लगाए जाएं ताकि ऑटोमैटिक रीडिंग और सटीक बिलिंग सुनिश्चित हो सके।
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एरियल बंच्ड केबल (ABC) का उपयोग: पारंपरिक नंगे तारों को बदलकर एरियल बंच्ड केबल लगाई जाए, जिससे कटिया लगाकर बिजली चोरी करना तकनीकी रूप से नामुमकिन हो जाए।
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फीडर सेग्रिगेशन (Feeder Segregation): कृषि और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग-अलग फीडर लाइनें बनाई जाएं, जिससे दोनों क्षेत्रों की खपत का पारदर्शी आकलन हो सके।
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कड़ा प्रवर्तन और विजिलेंस चेकिंग: बिजली चोरी के संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित छापेमारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
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राजस्व वसूली और डिजिटल भुगतान: बकाया राशि के भुगतान के लिए एकमुश्त समाधान योजनाएं (OTS) शुरू की जाएं और ऑनलाइन भुगतान प्रक्रियाओं को सुलभ बनाया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1: बिजली फीडर क्या होता है?
उत्तर: बिजली फीडर वह मुख्य वितरण लाइन होती है जो बिजली उपकेंद्र (Substation) से बिजली लेकर अलग-अलग मोहल्लों, गांवों या औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाती है।
Q2: उत्तर प्रदेश में कितने प्रतिशत बिजली फीडर घाटे में चल रहे हैं?
उत्तर: हालिया समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश के लगभग 62 प्रतिशत फीडर वित्तीय और तकनीकी घाटे में चल रहे हैं।
Q3: फीडर घाटे को कम करने के लिए सबसे प्रभावी कदम क्या है?
उत्तर: एरियल बंच्ड केबल (ABC) लगाना, स्मार्ट मीटरिंग लागू करना और बिजली चोरी पर कड़ा नियंत्रण पाना फीडर घाटा कम करने के सबसे प्रभावी उपाय हैं।
अस्वीकरण (Disclaimer)
यह लेख उत्तर प्रदेश बिजली विभाग की हालिया समीक्षा बैठकों और उपलब्ध सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को राज्य की बिजली वितरण व्यवस्था और सुधारत्मक उपायों की जानकारी प्रदान करना है। संबंधित नीतियां और आंकड़े समय-समय पर सरकारी घोषणाओं के अनुसार परिवर्तित हो सकते हैं।
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