शिमला. हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित नालागढ़ पुलिस स्टेशन के समीप हुए हालिया धमाके ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। इस घटना की गंभीरता तब और बढ़ गई जब प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) और पंजाब सोवरेन्टी अलायंस ने संयुक्त रूप से इस हमले की जिम्मेदारी ली।
प्रमुख बिंदु: अब तक की कार्रवाई
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जिम्मेदारी का दावा: सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से प्रतिबंधित संगठनों ने धमाके की जिम्मेदारी ली है, जिसके बाद प्रदेश में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।
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NIA की एंट्री: मामले की संवेदनशीलता और आतंकी संगठनों के शामिल होने के इनपुट मिलते ही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर जांच शुरू कर दी है।
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CCTV फुटेज की जांच: पुलिस थाना और आसपास के क्षेत्रों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों को खंगाला जा रहा है। संदिग्धों की पहचान के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
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फॉरेंसिक साक्ष्य: मौके से जुटाए गए विस्फोटकों के नमूनों को जांच के लिए लैब भेजा गया है ताकि इस्तेमाल किए गए आईईडी (IED) या विस्फोटक के प्रकार का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
धमाके के बाद हिमाचल-पंजाब सीमा पर नाकाबंदी सख्त कर दी गई है। सोलन पुलिस के अनुसार, संदिग्धों को पकड़ने के लिए विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी जारी है। शुरुआती जांच में इसे सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति भंग करने की एक साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
अधिकारियों का बयान: “हम हर पहलू की बारीकी से जांच कर रहे हैं। आतंकी संगठनों के दावों की पुष्टि की जा रही है और दोषियों को जल्द ही सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
लॉजिस्टिक्स की जांच: सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि स्थानीय ‘स्लीपर सेल’ ने हमलावरों को पनाह और लॉजिस्टिक्स मुहैया कराया होगा। नालागढ़ और बद्दी के औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण यहाँ बाहरी लोगों की भारी आवाजाही का फायदा उठाया गया।
डिजिटल फुटप्रिंट: बब्बर खालसा और पंजाब सोवरेन्टी अलायंस द्वारा जारी किए गए संदेशों के आईपी एड्रेस (IP Address) को ट्रेस किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि संदेश भारत से जारी हुए या सीमा पार (पाकिस्तान) से।
सीमा पर चौकसी: हिमाचल प्रदेश के सोलन और सिरमौर जिलों की पंजाब और हरियाणा से लगती सीमाओं पर सघन तलाशी अभियान (Cordon and Search Operation) चलाया जा रहा है।
Matribhumisamachar


