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ईरान संकट: ‘मिशन मोड’ में भारत, 1 करोड़ नागरिकों की सुरक्षा के लिए PM मोदी ने संभाली कमान

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खाड़ी देशों के नेताओं से बात करते हुए - कूटनीतिक सक्रियता।

नई दिल्ली. पश्चिमी एशिया में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की कथित मृत्यु और बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारत ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता को ‘मिशन मोड’ पर डाल दिया है। एक ओर जहाँ सरकार खाड़ी देशों में मौजूद करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर देश के भीतर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है।

प्रधानमंत्री की ‘टेलीफोन डिप्लोमेसी’

सूत्रों के अनुसार, पिछले 48 घंटों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खाड़ी क्षेत्र के आठ प्रमुख देशों के शीर्ष नेतृत्व से फोन पर बात की है। इन वार्ताओं का मुख्य केंद्र क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा रहा है। विदेश मंत्रालय स्थिति पर पल-पल की नजर रखे हुए है और संभावित आपातकालीन स्थितियों के लिए ‘इवेकुएशन प्लान’ (निकासी योजना) पर भी विचार किया जा रहा है।

खामेनेई की मृत्यु पर ‘चुप्पी’ और राजनीतिक रार

ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत की खबरों के बीच भारत सरकार की ओर से आधिकारिक शोक संदेश जारी न करने पर कांग्रेस ने कड़े सवाल उठाए हैं।

  • कांग्रेस का पक्ष: पार्टी नेताओं का तर्क है कि ईरान के साथ भारत के गहरे ऐतिहासिक, ऊर्जा और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। ऐसे में सरकार की ‘चुप्पी’ मानवीय और कूटनीतिक रूप से अनुचित है।

  • भाजपा का पलटवार: सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा ने 2011 में मुअम्मर गद्दाफी की मौत का हवाला देते हुए याद दिलाया कि तत्कालीन यूपीए सरकार ने भी कोई औपचारिक शोक व्यक्त नहीं किया था। भाजपा के अनुसार, “विदेश नीति भावनाओं से नहीं, बल्कि ठोस राष्ट्रीय हितों और सामरिक संतुलन से संचालित होती है।”

कूटनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय हित

जानकारों का मानना है कि भारत इस समय एक बेहद बारीक संतुलन साध रहा है। एक तरफ ईरान के साथ रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ इजरायल और अमेरिका के साथ बढ़ती साझेदारी। इसके अलावा, खामेनेई द्वारा अतीत में कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर दिए गए बयानों ने भी भारत के कूटनीतिक रुख को प्रभावित किया है।

सरकारी रुख: “भारत की प्राथमिकता फिलहाल किसी राजनीतिक बयानबाजी के बजाय अपने नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति को बाधित होने से बचाना है। राष्ट्रीय हित सर्वोपरि हैं।” — विदेश मंत्रालय सूत्र

प्रमुख बिंदु:

  • सुरक्षा: 1 करोड़ से अधिक भारतीयों के लिए दूतावासों को अलर्ट पर रखा गया है।

  • आर्थिक प्रभाव: लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में तनाव से तेल की कीमतों और समुद्री व्यापार पर असर की आशंका।

  • प्रदर्शन: देश के कुछ हिस्सों (विशेषकर कश्मीर और लखनऊ) में शिया समुदाय द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।

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