रांची । शनिवार, 15 अगस्त 2026
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संसद द्वारा पारित Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीएम सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर इस विधेयक पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने इसे “काला कानून” करार देते हुए कहा कि यदि केंद्र सरकार ने राज्यों के संवैधानिक और वित्तीय अधिकारों पर हमला बंद नहीं किया, तो झारखंड राज्यव्यापी ऐतिहासिक आंदोलन करेगा।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) से पारित MMDR Amendment Bill 2026 का मुख्य उद्देश्य राज्यों द्वारा खनिज-समृद्ध भूमि और खनन अधिकारों पर लगाए जाने वाले टैक्स, सेस और अन्य शुल्कों की शक्तियों को सीमित करना है।
1. राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर खतरा
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राजस्व का बड़ा नुकसान: झारखंड आर्थिक सर्वेक्षण (2025-26) के अनुसार, राज्य के अपने गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) में खनन राजस्व का हिस्सा 84.9% है।
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मिनरल बेयरिंग लैंड सेस: इस विधेयक से राज्य को ‘मिनरल बेयरिंग लैंड सेस’ से मिलने वाले लगभग ₹7,110 करोड़ सालाना राजस्व का सीधा नुकसान होगा।
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जनकल्याणकारी योजनाएं होंगी प्रभावित: राजस्व घटने से मंईयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, स्वास्थ्य एवं शिक्षा से जुड़ी योजनाएं ठप होने के कगार पर पहुंच सकती हैं।
2. केंद्र सरकार का तर्क
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केंद्र का कहना है कि विभिन्न राज्यों द्वारा अलग-अलग दर से टैक्स और सेस लगाने के कारण खनिजों की कीमतें बढ़ जाती हैं।
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राष्ट्रीय स्तर पर एकरूप कर व्यवस्था (Uniform Taxation) से घरेलू उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और निवेश आकर्षित होगा।
3. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवहेलना का आरोप
सीएम हेमंत सोरेन ने उल्लेख किया कि 25 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने फैसला दिया था कि राज्य सूची की ‘प्रविष्टि 49’ (Entry 49 of State List) के तहत राज्यों को खनन भूमि पर कर लगाने का संवैधानिक अधिकार है। नया विधेयक इस अधिकार पर सीधा अंकुश लगाता है।
केंद्र-राज्य संबंध और संघीय ढांचा
“खनिज झारखंड का, जमीन झारखंड की—तो हमारे हक-अधिकार का फैसला दिल्ली क्यों करेगी?” — हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री (झारखंड)
सीएम सोरेन ने तर्क दिया है कि देश के कुल खनिजों का लगभग 40% हिस्सा झारखंड से आता है। दशकों के खनन से राज्य की जनता ने विस्थापन, पर्यावरण प्रदूषण और भूमि अधिग्रहण जैसी गंभीर समस्याओं को झेला है। यदि इस संसाधन से मिलने वाला राजस्व ही छीन लिया जाएगा, तो राज्य का विकास रुक जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQ)
Q1: Mines and Minerals (Development and Regulation) Amendment Bill 2026 क्या है?
यह संसद द्वारा पारित एक विधेयक है जो खनन अधिकारों और खनिज-समृद्ध भूमि पर राज्यों द्वारा स्वतंत्र रूप से टैक्स, सेस या अतिरिक्त शुल्क लगाने के अधिकार को सीमित करता है।
Q2: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस बिल का विरोध क्यों कर रहे हैं?
सीएम हेमंत सोरेन के अनुसार, यह बिल झारखंड की वित्तीय स्वायत्तता को नुकसान पहुँचाएगा, जिससे राज्य को सालाना ₹7,000 करोड़ से अधिक का राजस्व नुकसान होगा और जनकल्याणकारी योजनाएं प्रभावित होंगी।
Q3: केंद्र सरकार का इस माइनिंग बिल पर क्या रुख है?
केंद्र सरकार का तर्क है कि देश भर में खनिजों की कीमतों में एकरूपता और प्रतिस्पर्धी माहौल बनाए रखने के लिए टैक्स ढांचे का सरलीकरण आवश्यक है।
Disclaimer
यह लेख उपलब्ध समाचार स्रोतों, आधिकारिक बयानों और हालिया संसदीय घटनाक्रमों के विश्लेषण पर आधारित है। इसका उद्देश्य विषय का निष्पक्ष और तथ्यात्मक विवरण प्रदान करना है।
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