सिंगापुर | 03 अप्रैल, 2026
सिंगापुर में रहने वाले भारतीय समुदाय, विशेष रूप से मलयाली और दक्षिण भारतीय भक्तों के लिए एक ऐतिहासिक खबर आई है। सिंगापुर सरकार ने उत्तरी इलाके के यिशुन एवेन्यू-3 में एक भव्य हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए जमीन आवंटित कर दी है। यह पिछले 20 वर्षों में सिंगापुर में आवंटित होने वाला पहला नया मंदिर भूखंड है।
इस मंदिर का नाम श्री गुरुवायूरप्पन अयप्पन मंदिर (SGAT) होगा, जो न केवल आस्था का केंद्र बनेगा बल्कि सिंगापुर की बहुसांस्कृतिक पहचान को भी नई ऊंचाई देगा।
🏛️ केरल शैली का अनूठा वास्तुशिल्प (Architecture)
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका डिज़ाइन होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह सिंगापुर के पारंपरिक ऊंचे ‘गोपुरम्स’ वाले मंदिरों से अलग होगा:
-
केरल गेबल डिज़ाइन: मंदिर का निर्माण पारंपरिक केरल शैली में किया जाएगा, जिसमें ढलवां छतें (Gables) होंगी। यह डिज़ाइन प्राकृतिक हवा के प्रवाह (Airflow) को बेहतर बनाने के साथ-साथ एक शांत आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करेगा।
-
भारत के बाहर पहला संगम: यह संभवतः भारत के बाहर पहला ऐसा मंदिर होगा जो विशेष रूप से भगवान गुरुवायूरप्पन (कृष्ण) और भगवान अयप्पा दोनों को समर्पित होगा।
🛕 सबरीमला की तर्ज पर ’18 पवित्र सीढ़ियां’
भगवान अयप्पा के भक्तों के लिए सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर में केरल के प्रसिद्ध सबरीमला मंदिर की तर्ज पर 18 पवित्र सीढ़ियां (Patinettaam Padi) भी बनाई जा सकती हैं। यह उन भक्तों के लिए बहुत महत्वपूर्ण होगा जो हर साल सबरीमला की कठिन यात्रा पर जाते हैं। मंदिर परिसर में एक ‘एनेक्स बिल्डिंग’ भी होगी जिसमें सांस्कृतिक कार्यक्रमों, अंतर-धार्मिक संवाद और सामाजिक कार्यों के लिए मल्टीपर्पज हॉल बनाया जाएगा।
📅 कब शुरू होगा निर्माण?
योजना के अनुसार, मंदिर का निर्माण कार्य अगस्त या सितंबर 2026 तक शुरू होने की उम्मीद है। इसे पूरा होने में लगभग 3 साल का समय लग सकता है। यह सिंगापुर का 25वां आधिकारिक हिंदू मंदिर होगा। इससे पहले साल 2006 में सेंगकांग में ‘अरुल्मिगु वेलमुरुगन ज्ञानमुनिश्वरर मंदिर’ बनाया गया था।
📊 मंदिर से जुड़ी मुख्य जानकारियां एक नजर में
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| नाम | श्री गुरुवायूरप्पन अयप्पन मंदिर (SGAT) |
| लोकेशन | यिशुन एवेन्यू-3 (Yishun Avenue 3), सिंगापुर |
| मुख्य देवता | भगवान गुरुवायूरप्पन और भगवान अयप्पा |
| प्रोजेक्ट टाइमलाइन | निर्माण शुरू: सितंबर 2026 |
| विशेषता | केरल वास्तुकला और सबरीमला परंपरा |
| आधिकारिक घोषणा | संस्कृति राज्य मंत्री दिनेश वासु दास द्वारा (28 मार्च) |
🗣️ सरकार और समुदाय का रुख
28 मार्च को पवित्र पंगुनी उथिरम उत्सव के दौरान इस मंदिर की घोषणा करते हुए संस्कृति, समुदाय और युवा मामलों के राज्य मंत्री दिनेश वासु दास ने कहा:
“यह हिंदू समुदाय के लिए एक उत्सव का क्षण है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि ‘हार्मोनी सर्कल’ के रूप में अन्य धर्मों के लोगों को हिंदू संस्कृति समझने का मौका भी देगा।”
गृह मंत्री के. शनमुगम ने भी इस पर खुशी जताते हुए कहा कि यह मलयाली समुदाय की लंबे समय से चली आ रही इच्छा को पूरा करेगा।
🥥 पुजारियों की विशेष व्यवस्था
मंदिर की पवित्रता और पारंपरिक शुद्धता बनाए रखने के लिए केरल से विशेष पुजारियों को नियुक्त किया जाएगा। इनमें सबरीमला मंदिर के अनुष्ठानों में अनुभवी पुजारी शामिल होंगे, ताकि सिंगापुर में भी वही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस की जा सके जो दक्षिण भारत के प्रमुख मंदिरों में होती है।
निष्कर्ष:
यिशुन में बनने वाला यह मंदिर प्रवासी भारतीयों के लिए अपनी जड़ों से जुड़े रहने का एक मजबूत जरिया बनेगा। यह न केवल बुजुर्गों के लिए सुलभ होगा, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी प्राचीन परंपराओं और वास्तुशिल्प से परिचित कराएगा।
Matribhumisamachar


