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मोजतबा खामेनेई बने ईरान के नए सर्वोच्च नेता: अली खामेनेई के निधन के बाद सत्ता में बड़ा उलटफेर

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मोजतबा खामेनेई ईरान के सर्वोच्च नेता

तेहरान. मध्य पूर्व के सबसे शक्तिशाली देशों में से एक, ईरान से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। महीनों से चल रही अटकलों और अमेरिका-इजराइल के हालिया हमलों के बीच, ईरान की असेम्बली ऑफ एक्सपर्ट्स (Assembly of Experts) ने आधिकारिक तौर पर मोजतबा खामेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता (Supreme Leader) चुन लिया है।

यह निर्णय ईरान के कद्दावर नेता अली खामेनेई के निधन के बाद लिया गया है। 88 सदस्यों वाली इस शक्तिशाली धार्मिक सभा ने सर्वसम्मति से मोजतबा के नाम पर मुहर लगाई, जिससे ईरान की सत्ता में दशकों बाद एक बड़ा “नेतृत्व परिवर्तन” देखने को मिला है।

मोजतबा खामेनेई: पर्दे के पीछे से सत्ता के शीर्ष तक

मोजतबा खामेनेई, जो अब तक ईरान की राजनीति में एक रहस्यमयी लेकिन प्रभावशाली ‘गेटकीपर’ माने जाते थे, अब दुनिया के सामने देश के सबसे बड़े ओहदे पर हैं। उनके बारे में कुछ प्रमुख बातें:

  • जन्म और शिक्षा: 1969 में मशहद में जन्मे मोजतबा ने अपना बचपन क्रांति के साये में बिताया। उन्होंने कोम (Qom) के मदरसों में शिक्षा ली, हालांकि उनके पास ‘अयातुल्ला’ की औपचारिक धार्मिक पदवी नहीं है।

  • युद्ध का अनुभव: 1980 के दशक के ईरान-इराक युद्ध में उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई, जहाँ उन्होंने सेना और खुफिया विभाग के उन अधिकारियों के साथ नेटवर्क बनाया जो आज IRGC (क्रांतिकारी गार्ड्स) के शीर्ष पदों पर हैं।

  • शक्ति का केंद्र: आधिकारिक पद न होने के बावजूद, 2019 में अमेरिका ने उन पर प्रतिबंध लगाए थे। वाशिंगटन का मानना था कि अली खामेनेई ने अपनी अधिकांश शक्तियां मोजतबा को सौंप दी थीं।

वंशानुगत शासन पर उठते सवाल

ईरान की 1979 की क्रांति का मूल आधार “राजशाही और वंशवाद” का विरोध था। मोजतबा का चयन इस विचारधारा के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।

विश्लेषकों का मत: “अली खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से कभी अपने बेटे को उत्तराधिकारी के तौर पर पेश नहीं किया था। ऐसे में मोजतबा का चुनाव यह दर्शाता है कि ईरान का सत्ता प्रतिष्ठान (Establishment) बाहरी खतरों और आंतरिक अस्थिरता के बीच ‘निरंतरता’ (Continuity) को प्राथमिकता दे रहा है।”

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और चुनौतियां

मोजतबा खामेनेई का कार्यकाल चुनौतियों से भरा होने वाला है:

  1. इजराइल-अमेरिका के साथ तनाव: हालिया हमलों के बाद ईरान की सैन्य रणनीति क्या होगी, इस पर पूरी दुनिया की नजर है।

  2. आर्थिक संकट: पश्चिमी प्रतिबंधों और कथित तौर पर मोजतबा के अपने विशाल निवेश नेटवर्क को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कड़ी निगरानी रहेगी।

  3. घरेलू असंतोष: सुधारवादी नेताओं द्वारा मोजतबा पर चुनावों में दखल के पुराने आरोपों के कारण देश के भीतर विरोध के स्वर उठ सकते हैं।

आगे क्या?

तेहरान में सत्ता के इस हस्तांतरण के बाद अब सबकी नजरें मोजतबा के पहले सार्वजनिक संबोधन पर हैं, जो ईरान की भविष्य की विदेश नीति और परमाणु कार्यक्रम की दिशा तय करेगा।

मातृभूमि समाचार – ईरान इजराइल संघर्ष

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