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कानपुर में हाड़ कपा देने वाली ठंड का कहर: हार्ट अटैक और ब्रेन स्ट्रोक से मौतों के आंकड़े डराने लगे

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कानपुर. उत्तर भारत सहित औद्योगिक नगरी कानपुर में इस समय “कोल्ड टॉर्चर” चरम पर है। पिछले कुछ दिनों से पारा लगातार गिरने के कारण स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं पैदा हो गई हैं। शहर के प्रमुख अस्पतालों, विशेष रूप से लक्ष्मीपत सिंहानिया हृदय रोग संस्थान (कार्डियोलॉजी) और LLR अस्पताल में दिल के दौरे और ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों की संख्या में भारी उछाल देखा जा रहा है।

प्रमुख बिंदु और चिंताजनक आंकड़े:

मौतों का सिलसिला: पिछले 24 घंटों में कार्डियोलॉजी विभाग में दर्जनों मरीज गंभीर स्थिति में पहुंचे, जिनमें से कई को अस्पताल पहुँचते ही मृत (Brought Dead) घोषित कर दिया गया। खबरों के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में जिले में हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण मौतों का आंकड़ा 100 के करीब पहुँच गया है।

न्यूनतम तापमान: रविवार की रात कानपुर का न्यूनतम तापमान 3.2°C रिकॉर्ड किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। बर्फीली हवाओं ने गलन और ठिठुरन को और बढ़ा दिया है।

अस्पतालों में भीड़: कार्डियोलॉजी की ओपीडी में प्रतिदिन 700 से 1000 मरीज पहुँच रहे हैं। इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह भरे हुए हैं और स्ट्रेचर तक की कमी महसूस की जा रही है।

युवा भी चपेट में: डॉक्टरों के अनुसार, यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। खराब जीवनशैली और अत्यधिक ठंड के कारण 30 से 45 वर्ष की आयु के युवाओं में भी ‘साइलेंट अटैक’ के मामले बढ़ रहे हैं।

ठंड में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

विशेषज्ञों के अनुसार, कड़ाके की ठंड में हमारी नसें सिकुड़ जाती हैं, जिसे ‘वैसोकॉन्स्ट्रिक्शन’ कहा जाता है। इससे रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है और ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। खून के थक्के (Blood Clots) जमने की संभावना बढ़ जाती है, जो सीधे तौर पर हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का कारण बनती है।

डॉक्टरों की सलाह: ‘बचाव ही एकमात्र रास्ता’

हृदय रोग संस्थान के विशेषज्ञों ने नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी की है:

सुबह की सैर से बचें: जब तक धूप न खिले, बाहर निकलने से परहेज करें। सुबह की ओस और बर्फीली हवा जानलेवा हो सकती है।

शरीर को गर्म रखें: सिर, कान और पैरों को हमेशा ढक कर रखें। परतों में कपड़े पहनें।

खान-पान का ध्यान: गुनगुना पानी पिएं और नमक का सेवन कम करें ताकि बीपी नियंत्रित रहे।

लक्षणों को न पहचानें: सीने में भारीपन, अचानक पसीना आना या बोलने में लड़खड़ाहट जैसे लक्षणों को ‘गैस की समस्या’ समझकर नजरअंदाज न करें, तुरंत डॉक्टर से मिलें।

कानपुर के प्रमुख अस्पतालों के हेल्पलाइन नंबर

अस्पताल का नाम विभाग / विशेषता हेल्पलाइन नंबर
LPS कार्डियोलॉजी संस्थान हृदय रोग (Heart) 0512-2556551, 2556143
हैलेट (LLR) अस्पताल इमरजेंसी / जनरल 0512-2535441
रीजेंसी अस्पताल मल्टी-स्पेशियलिटी 0512-2584211
फॉर्च्यून अस्पताल इमरजेंसी केयर 0512-2582801
सरकारी एम्बुलेंस सेवा आपातकालीन 102, 108

ठंड में हृदय को स्वस्थ रखने के लिए डाइट चार्ट

ठंड के दौरान खून गाढ़ा होने और बीपी बढ़ने का खतरा रहता है। यह डाइट चार्ट आपके शरीर को अंदर से गर्म और नसों को लचीला रखने में मदद करेगा:

सुबह की शुरुआत (7:00 AM – 8:00 AM)

  • गुनगुना पानी: सुबह उठते ही 1-2 गिलास हल्का गर्म पानी पिएं।

  • मेथी दाना: रात भर भीगे हुए आधा चम्मच मेथी दाने का सेवन करें (यह कोलेस्ट्रॉल और शुगर नियंत्रित करता है)।

  • भीगे बादाम और अखरोट: 4 बादाम और 1 अखरोट (हृदय के लिए ओमेगा-3 का अच्छा स्रोत)।

नाश्ता (9:00 AM – 10:00 AM)

  • ओट्स या दलिया: सब्जियों के साथ बना हुआ नमकीन ओट्स या दलिया।

  • अदरक वाली चाय/काढ़ा: चीनी की जगह गुड़ का सीमित इस्तेमाल करें। तुलसी और काली मिर्च जरूर डालें।

दोपहर का भोजन (1:00 PM – 2:00 PM)

  • मिस्सी रोटी: चोकर युक्त आटा या बाजरा/ज्वार की रोटी (बाजरा गर्म तासीर का होता है)।

  • हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक, मेथी या बथुआ (आयरन और पोटेशियम से भरपूर)।

  • लहसुन: सब्जी में 2-3 कली लहसुन का प्रयोग करें, यह प्राकृतिक ब्लड थिनर (खून पतला करने वाला) है।

शाम का नाश्ता (4:00 PM – 5:00 PM)

  • भुने हुए मखाने: हल्का सेंधा नमक डालकर (पोटेशियम का अच्छा स्रोत)।

  • वेजिटेबल सूप: टमाटर, गाजर और अदरक का गरमा-गरम सूप।

रात का भोजन (7:30 PM – 8:30 PM)

  • हल्का खाना: मूंग की दाल और एक या दो चपाती। रात को भारी खाने से बचें ताकि बीपी न बढ़े।

  • हल्दी वाला दूध: सोने से पहले एक गिलास गुनगुने दूध में चुटकी भर हल्दी डालें (एंटी-इंफ्लेमेटरी)।

विशेष सावधानियां:

  • नमक कम करें: ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाता है, जिससे स्ट्रोक का खतरा रहता है।

  • तला-भुना न खाएं: ठंड में ज्यादा पराठे या पकोड़े खाने से कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है, जो नसों में ब्लॉकेज पैदा कर सकता है।

  • धूम्रपान और शराब से दूरी: ये दोनों नसों को सिकोड़ते हैं और अटैक का खतरा कई गुना बढ़ा देते हैं।

नोट : यह एक सामान्य जानकारी है. कृपया समस्या होने पर किसी विशेषज्ञ से चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लें

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