इंफाल. मणिपुर की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है। 4 फरवरी 2026 को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता युमनम खेमचंद सिंह ने राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। इस शपथ ग्रहण के साथ ही मणिपुर में लगभग एक वर्ष से लागू राष्ट्रपति शासन (President’s Rule) औपचारिक रूप से समाप्त हो गया, जिसे राज्य में लोकतांत्रिक प्रक्रिया की वापसी के रूप में देखा जा रहा है।
🏛️ इंफाल में शपथ ग्रहण समारोह
इंफाल स्थित लोक भवन (राजभवन) में आयोजित समारोह में मणिपुर के राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने युमनम खेमचंद सिंह को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
यह समारोह राजनीतिक स्थिरता और नए सिरे से शासन की शुरुआत का प्रतीक माना जा रहा है।
🤝 समावेशी सरकार का गठन: दो उपमुख्यमंत्री
नई सरकार की सबसे बड़ी विशेषता इसका समावेशी स्वरूप है, जो राज्य के जातीय संतुलन को साधने की दिशा में एक अहम प्रयास माना जा रहा है।
🔹 उपमुख्यमंत्री नियुक्तियां
- नेमचा किपजेन –
- कुकी–जो समुदाय से
- मणिपुर की पहली महिला कुकी–जो उपमुख्यमंत्री
- उन्होंने दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से शपथ ली
- एल. दिखो –
- नगा समुदाय से
- नगा पीपुल्स फ्रंट (NPF) के वरिष्ठ नेता
🔹 अन्य प्रमुख मंत्री
- गोविंददास कोंथुजाम (भाजपा)
- खुराइजम लोकेन सिंह (नेशनल पीपुल्स पार्टी – NPP)
यह मंत्रिमंडल संरचना भाजपा और सहयोगी दलों के बीच सहमति और संतुलन को दर्शाती है।
👤 मुख्यमंत्री युमनम खेमचंद सिंह का राजनीतिक सफर
62 वर्षीय युमनम खेमचंद सिंह मैतई समुदाय से आते हैं और इंफाल की सिंगजामेई विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
प्रमुख उपलब्धियां
- 2017–2022: मणिपुर विधानसभा के अध्यक्ष (स्पीकर)
- राजनीति के साथ खेलों में भी रुचि
- तायक्वोंडो में ब्लैक बेल्ट धारक और पूर्व मार्शल आर्ट्स खिलाड़ी
पूर्व मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह के स्थान पर उन्हें एक सर्वसम्मत और अपेक्षाकृत सर्वस्वीकृत चेहरे के रूप में चुना गया है।
🔍 राष्ट्रपति शासन के बाद नई उम्मीदें
करीब एक साल बाद बनी यह नई सरकार शांति बहाली, कानून-व्यवस्था, पुनर्वास और विकास जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रहने की उम्मीद जगा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दो उपमुख्यमंत्रियों की नियुक्ति से कुकी–जो और नगा समुदायों को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिला है, जिससे सामाजिक संतुलन को मजबूती मिल सकती है।
मणिपुर में युमनम खेमचंद सिंह के नेतृत्व में बनी नई सरकार केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राष्ट्रपति शासन के बाद लोकतांत्रिक विश्वास की पुनर्स्थापना का संकेत है। आने वाले समय में सरकार की नीतियां और फैसले यह तय करेंगे कि राज्य कितनी तेजी से स्थिरता और विकास की राह पर आगे बढ़ता है।
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