नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने देश के प्रशासनिक ढांचे में एक बड़ा और निर्णायक बदलाव करते हुए कई राज्यों के राज्यपालों और केंद्र शासित प्रदेशों के उपराज्यपालों (LG) की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आरिफ मोहम्मद खान और सी.वी. आनंद बोस समेत कई दिग्गजों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं, जिसके बाद 9 राज्यों और UT में नई नियुक्तियों का आदेश जारी किया गया है।
इस बड़े फेरबदल का सबसे मुख्य केंद्र दिल्ली रहा है, जहाँ पूर्व वरिष्ठ राजनयिक को कमान सौंपी गई है।
प्रमुख इस्तीफे: इन दिग्गजों ने छोड़ी कुर्सी
इस प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत कई हाई-प्रोफाइल इस्तीफे सामने आए हैं:
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आरिफ मोहम्मद खान: केरल के बाद बिहार के राज्यपाल के रूप में सेवाएं दे रहे आरिफ मोहम्मद खान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वे अपने मुखर अंदाज और संवैधानिक मूल्यों पर अपनी राय के लिए चर्चा में रहे हैं।
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सी.वी. आनंद बोस: पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद से इनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। चुनावी राज्य बंगाल में इनके जाने के बाद अब नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू होगी।
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कविंदर गुप्ता: लद्दाख के उपराज्यपाल पद से इस्तीफा दिया, हालांकि उन्हें तुरंत हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल बनाकर नई जिम्मेदारी दी गई है।
नई नियुक्तियां: दिल्ली को मिला नया ‘बॉस’
1. दिल्ली: तरणजीत सिंह संधू की एंट्री
भारत के पूर्व वरिष्ठ राजनयिक और अमेरिका में राजदूत रहे तरणजीत सिंह संधू को दिल्ली का नया उपराज्यपाल नियुक्त किया गया है। संधू के पास अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का विशाल अनुभव है, जिसका लाभ अब दिल्ली के प्रशासनिक सुधारों में मिलने की उम्मीद है।
2. लद्दाख और पश्चिम बंगाल
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विनय कुमार सक्सेना: दिल्ली के उपराज्यपाल रहे सक्सेना को अब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लद्दाख का उपराज्यपाल बनाया गया है।
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आर.एन. रवि: तमिलनाडु के राज्यपाल पद से स्थानांतरित कर उन्हें पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
राज्यों की नई सूची: किसे, कहाँ मिली कमान?
नीचे दी गई तालिका में इस फेरबदल की पूरी तस्वीर स्पष्ट है:
| नाम | नया पद/राज्य | मुख्य पृष्ठभूमि |
| तरणजीत सिंह संधू | उपराज्यपाल, दिल्ली | पूर्व राजनयिक (IFS) |
| विनय कुमार सक्सेना | उपराज्यपाल, लद्दाख | दिल्ली के पूर्व LG |
| आर.एन. रवि | राज्यपाल, पश्चिम बंगाल | तमिलनाडु के पूर्व राज्यपाल |
| ले. जनरल सैयद अता हसनैन | राज्यपाल, बिहार | सैन्य विशेषज्ञ (सेवानिवृत्त) |
| राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर | राज्यपाल, केरल + तमिलनाडु | अतिरिक्त प्रभार (तमिलनाडु) |
| शिव प्रताप शुक्ला | राज्यपाल, तेलंगाना | हिमाचल के पूर्व राज्यपाल |
| जिष्णु देव वर्मा | राज्यपाल, महाराष्ट्र | तेलंगाना के पूर्व राज्यपाल |
| नंद किशोर यादव | राज्यपाल, नागालैंड | वरिष्ठ भाजपा नेता |
| कविंदर गुप्ता | राज्यपाल, हिमाचल प्रदेश | लद्दाख के पूर्व LG |
फेरबदल के पीछे की रणनीति
विशेषज्ञों के अनुसार, यह फेरबदल ‘प्रशासनिक सक्रियता’ और ‘रणनीतिक संतुलन’ का हिस्सा है:
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राजनयिक अनुभव: दिल्ली में तरणजीत सिंह संधू की नियुक्ति केंद्र सरकार की उस नीति को दर्शाती है जहाँ राजधानी के जटिल मुद्दों को सुलझाने के लिए वैश्विक अनुभव वाले व्यक्ति की आवश्यकता थी।
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सुरक्षा प्राथमिकता: बिहार में ले. जनरल सैयद अता हसनैन की नियुक्ति सुरक्षा और शासन व्यवस्था में कड़े अनुशासन का संकेत है।
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राज्यों के साथ समन्वय: आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए कई राज्यों में ऐसे चेहरों को भेजा गया है जो केंद्र और राज्य के बीच बेहतर सेतु का काम कर सकें।
निष्कर्ष: आरिफ मोहम्मद खान और अन्य वरिष्ठों के इस्तीफे के बाद राजभवनों की यह नई तस्वीर भारत की आंतरिक शासन व्यवस्था में एक नया अध्याय शुरू करेगी।
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