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बिहार राजनीति में बड़ा धमाका: सम्राट कैबिनेट का विस्तार, नीतीश के बेटे निशांत के मंत्री बनने की अटकलें तेज

Saransh Kanaujia
Saransh Kanaujia - Editor
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पटना । बुधवार, 6 मई 2026

बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ आने वाला है। 15 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के कार्यभार संभालने के बाद, अब राज्य की NDA सरकार अपने मंत्रिमंडल का पूर्ण विस्तार करने जा रही है। इस शपथ ग्रहण समारोह की सबसे बड़ी चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर है, जिनके कल मंत्री पद की शपथ लेने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

27 नए मंत्री लेंगे शपथ: गांधी मैदान में भव्य तैयारी

पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान कल यानी 7 मई 2026 को एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का गवाह बनेगा। दोपहर 12:10 बजे होने वाले इस शपथ ग्रहण समारोह में कुल 27 मंत्री पद और गोपनीयता की शपथ ले सकते हैं। इस कार्यक्रम की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन खुद मौजूद रहेंगे।

निशांत कुमार: राजनीति में नई पारी की शुरुआत?

सूत्रों के अनुसार, जेडीयू के दिग्गज नेताओं—ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी—ने नीतीश कुमार से मुलाकात कर निशांत कुमार के नाम पर अंतिम चर्चा की है। हालांकि निशांत पहले सक्रिय राजनीति और पद से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं के आग्रह के बाद उन्होंने कैबिनेट में शामिल होने पर सहमति दे दी है। इसे बिहार में नीतीश कुमार की विरासत को आगे बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है।

संभावित मंत्रियों की सूची और समीकरण

भाजपा और जेडीयू के बीच मंत्री पदों का बंटवारा 50-50 फॉर्मूले पर होने की उम्मीद है।

  • भाजपा (BJP): करीब 12 मंत्री शपथ ले सकते हैं, जिनमें मंगल पांडे, रामकृपाल यादव, और श्रेयसी सिंह जैसे नाम प्रमुख हैं।

  • जेडीयू (JD-U): करीब 11 मंत्री शपथ ले सकते हैं। पुराने चेहरों के साथ-साथ रत्नेश सदा और शीला मंडल जैसे नए चेहरों को भी जगह मिलने की उम्मीद है।

  • सहयोगी दल: चिराग पासवान की पार्टी LJP(R) से 2, जबकि HAM और RLM से 1-1 मंत्री बनाए जा सकते हैं।

नोट: कुछ सोशल मीडिया रिपोर्टों में सम्राट चौधरी के साथ शपथ लेने वाले मंत्रियों के नाम में भ्रम था। स्पष्ट कर दें कि 15 अप्रैल को सम्राट चौधरी के साथ जेडीयू से विजय कुमार चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव ने शपथ ली थी।

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लेखक वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अब तक वे इतिहास से जुड़ी चार पुस्तकों का लेखन कर चुके हैं—‘भारत : 1857 से 1957 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘भारत : 1885 से 1950 इतिहास पर एक दृष्टि’, ‘गाँधी जी की राजनीतिक यात्रा के कुछ पन्ने’ और ‘1857 का स्वतंत्रता समर – कारण से परिणाम तक’। पत्रकारिता के क्षेत्र में वे विशेष रूप से राजनीति, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विषयों और आध्यात्म से जुड़े समाचारों एवं विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वर्षों के पत्रकारिता अनुभव और विभिन्न विषयों पर निरंतर लेखन के माध्यम से उन्होंने समसामयिक घटनाओं के साथ-साथ ऐतिहासिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विषयों को भी पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है।