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श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का फैसला: राम मंदिर दान प्रबंधन में पारदर्शिता के लिए 3-सदस्यीय समिति का गठन, 582 करोड़ के चढ़ावे का दिया ब्यौरा

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अयोध्या । सोमवार, 06 जुलाई 2026

अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था इस पवित्र धाम से जुड़ी हुई है। हाल के दिनों में मंदिर के चढ़ावे और प्रबंधन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की सोमवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में मंदिर प्रशासन, दान प्रबंधन और संगठनात्मक व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी, जवाबदेह तथा प्रभावी बनाने के लिए कई कड़े और ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक वित्तीय और प्रशासनिक प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक व कड़े नियमों का पालन किया जाएगा।

प्रशासनिक ढांचे का पुनर्गठन और कार्यप्रणाली में बदलाव

बैठक के दौरान ट्रस्ट के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने पर सभी सदस्यों ने सहमति जताई। प्रशासनिक जिम्मेदारियों का पुनर्गठन करते हुए यह निर्णय लिया गया कि भविष्य में सभी महत्वपूर्ण कार्य और परियोजनाएं पूर्व-निर्धारित प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार ही संचालित की जाएंगी। इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी स्तर पर भ्रम या जवाबदेही की कमी की स्थिति को पूरी तरह समाप्त करना है।

राम मंदिर को मिला ₹582 करोड़ का चढ़ावा: पारदर्शिता पर विशेष जोर

बैठक में राम मंदिर को प्राप्त होने वाले दान और चढ़ावे की व्यवस्था की विस्तृत वित्तीय समीक्षा की गई। ट्रस्ट द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक मंदिर को लगभग 582 करोड़ रुपये का चढ़ावा प्राप्त हुआ है

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया कि सभी प्रकार के नगद, ऑनलाइन और आभूषणों के रूप में मिले दान का रिकॉर्ड पूरी तरह व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाता है। वित्तीय लेनदेन को दर्ज करने के लिए पारदर्शी ऑडिट प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।

चांदी की वस्तुओं और बहुमूल्य भेंटों के रिकॉर्ड पर दी सफाई

पिछले कुछ दिनों में विभिन्न मीडिया माध्यमों और सोशल मीडिया पर मंदिर को भेंट में मिली चांदी की वस्तुओं और आभूषणों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे। इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करते हुए ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर को प्राप्त सभी बहुमूल्य भेंटों का विस्तृत और पंजीकृत विवरण मौजूद है। जिन चांदी की वस्तुओं को लेकर चर्चाएं थीं, उनका प्रबंधन भी निर्धारित सरकारी और धार्मिक नियमों के तहत किया गया है और उनके सभी अभिलेख (Documents) पूरी तरह सुरक्षित हैं।

3-सदस्यीय समीक्षा समिति का गठन और SIT जांच में सहयोग का आश्वासन

बैठक का सबसे बड़ा फैसला दान और भेंट से संबंधित प्रक्रियाओं की कड़ी निगरानी के लिए एक तीन सदस्यीय समिति (Three-Member Committee) का गठन करना रहा। यह समिति:

  1. मंदिर के सभी पुराने और नए रिकॉर्ड्स की जांच करेगी।

  2. दान प्रबंधन व्यवस्था और सुरक्षा ऑडिट की समीक्षा करेगी।

  3. व्यवस्था को और अधिक आधुनिक तथा त्रुटिहीन बनाने के लिए अपनी विस्तृत रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपेगी।

संबंधित खबरों के लिए आवश्यक सुधार और पृष्ठभूमि:

हाल ही में यूपी सरकार द्वारा गठित विशेष जांच टीम (SIT) इस मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है। ट्रस्ट ने बैठक में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह जांच प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग कर रहा है और सभी आवश्यक दस्तावेज जांच एजेंसियों को उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि तथ्यों के आधार पर ही दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

श्रद्धालुओं की आस्था को बनाए रखना सर्वोच्च जिम्मेदारी

ट्रस्ट ने अपने वक्तव्य को दोहराते हुए कहा कि श्रीराम मंदिर विश्वभर के सनातनी समाज की अटूट आस्था का केंद्र है। प्रशासनिक और वित्तीय मामलों में जरा सी भी शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में लेखा प्रणाली (Accounting System) को और अधिक डिजिटल और जवाबदेह बनाने के लिए नए सॉफ्टवेयर और आधुनिक सुरक्षा मानकों को लागू किया जाएगा।

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