अयोध्या । सोमवार, 6 जुलाई 2026
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और आभूषणों के प्रबंधन को लेकर उपजे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक सोमवार को आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में मंदिर के प्रशासनिक ढांचे, वित्तीय पारदर्शिता, विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट और ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों के इस्तीफों सहित कई संवेदनशील विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
यह बैठक ऐसे समय में बुलाई गई है जब योगी सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआईटी (SIT) को जांच के लिए 15 दिन का अतिरिक्त समय दिया है, ताकि पूरे मामले के ‘मनी ट्रेल’ और वित्तीय रिकॉर्ड्स का बारीकी से मिलान किया जा सके।
एसआईटी (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट और 5 सालों के खातों का ऑडिट
बैठक का सबसे प्रमुख एजेंडा मंदिर में दान प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बाद की स्थिति की समीक्षा करना था। ट्रस्ट के सदस्यों ने मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) की अंतरिम रिपोर्ट पर गहन विचार-विमर्श किया।
इस मामले में नवीनतम अपडेट यह है कि प्रशासन अब ट्रस्ट के पिछले 5 सालों के खातों का विस्तृत ऑडिट करने जा रहा है। बैठक में भविष्य में दान की गणना, रिकॉर्डिंग और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी एवं अचूक बनाने के उपायों पर ठोस चर्चा हुई, ताकि आगे ऐसी किसी भी गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर क्या हुआ?
इस विवाद के सामने आने के बाद से ही ट्रस्ट के प्रशासनिक नेतृत्व पर सवाल उठ रहे थे। बैठक के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा द्वारा सौंपे गए इस्तीफों पर भी गंभीरता से विचार किया गया। दोनों ही पदाधिकारियों ने हाल के विवाद के बाद नैतिक आधार पर अपने-अपने पदों को छोड़ने की पेशकश की थी।
बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों ने इस संवेदनशील विषय पर अपनी राय रखी और आगे की कानूनी व प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा की। हालांकि, ट्रस्ट की ओर से फिलहाल किसी बड़े नेतृत्व परिवर्तन या इस्तीफों को स्वीकार करने पर किसी अंतिम निर्णय की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। माना जा रहा है कि विस्तृत और अंतिम आधिकारिक बयान जारी होने के बाद ही इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
मनी ट्रेल पर मुख्य फोकस और जांच के लिए मिला अतिरिक्त समय
योगी सरकार इस पूरे मामले में जीरो टॉलरेंस की नीति अपना रही है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि श्रद्धालुओं की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि जांच टीम को अब मुख्य रूप से ‘मनी ट्रेल’ (पैसे के लेन-देन के स्रोतों और रास्तों) पर ध्यान केंद्रित करने को कहा गया है।
प्रशासनिक सुधार और वित्त वर्ष 2025-26 की समीक्षा
मंदिर के दैनिक संचालन और वित्तीय ढांचे को और अधिक सुदृढ़ तथा आधुनिक बनाने के लिए बैठक में कई सुधारात्मक प्रस्ताव पेश किए गए:
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डिजिटल और आधुनिक वित्तीय प्रबंधन: दान राशि की रसीद, आभूषणों के मूल्यांकन और बैंक जमा प्रक्रियाओं को पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ने का सुझाव दिया गया है।
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प्रशासनिक दक्षता: मंदिर संचालन के लिए पेशेवर और नई व्यवस्थाएं लागू करने पर सहमति बनी है।
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आय-व्यय की समीक्षा: बैठक में वित्त वर्ष 2025-26 के वार्षिक आय-व्यय विवरण (बजट), लेखा अभिलेखों (अकाउंट रिकॉर्ड्स) और अन्य लंबित वित्तीय प्रस्तावों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
राम मंदिर ट्रस्ट की इस बैठक के फैसलों और एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर अब देश भर के राम भक्तों की नजरें टिकी हुई हैं। ट्रस्ट ने आश्वासन दिया है कि मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता को बनाए रखने के लिए हर संभव सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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