तेहरान. मध्य पूर्व में पिछले सात दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बीच आज एक नाटकीय मोड़ आया है। एक तरफ ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों पर हुए हमलों के लिए माफी मांगते हुए इसे ‘सैन्य चूक’ बताया है, तो दूसरी तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान के पूर्ण आत्मसमर्पण की मांग की है।
ईरानी राष्ट्रपति का ‘शांति कार्ड’ और शर्त
सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित एक रिकॉर्डेड संदेश में राष्ट्रपति पेजेशकियन ने बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से माफी मांगी। उन्होंने कहा:
“पड़ोसी देशों पर हुए हमले हमारी सेना के भीतर संवाद की कमी (Miscommunication) का नतीजा थे। ईरान क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है और हम यह सुनिश्चित करेंगे कि भविष्य में ऐसी गलतियां न हों।”
हालांकि, पेजेशकियन ने एक बड़ी शर्त भी रखी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। गौरतलब है कि पिछले दिनों ईरान ने UAE के दुबई एयरपोर्ट और बहरीन में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डों को निशाना बनाने की कोशिश की थी।
ट्रंप का ‘MIGA’ मिशन: “झुकना ही होगा”
इधर, वॉशिंगटन में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीतिक बातचीत की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा:
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सरेंडर की मांग: ईरान के पास ‘बिना शर्त आत्मसमर्पण’ के अलावा कोई विकल्प नहीं है।
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नया नेतृत्व: ट्रंप ने कहा कि वे ईरान के अगले नेतृत्व के चयन में अपनी भूमिका चाहते हैं और उन्होंने MIGA (Make Iran Great Again) का नारा दिया।
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हथियारों की खेप: अमेरिका ने इस बीच इजरायल को 151 मिलियन डॉलर के नए घातक हथियारों की बिक्री को मंजूरी दे दी है। अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में ईरान पर अब तक का सबसे भीषण हवाई हमला (Bombing Campaign) किया जा सकता है।
यरूशलेम में धमाके और इजरायली जवाबी हमला
शनिवार सुबह यरूशलेम और मध्य इजरायल के आसमान में सायरन की आवाजें गूंज उठीं। ईरान द्वारा दागी गई मिसाइलों के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
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इजरायली एयर डिफेंस: इजरायली सेना (IDF) के अनुसार, अधिकांश मिसाइलों को बीच में ही मार गिराया गया है और किसी बड़े नुकसान की खबर नहीं है।
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जवाबी कार्रवाई: इजरायल के 80 लड़ाकू विमानों ने तेहरान और इस्फहान में ईरान के मिसाइल कारखानों और सैन्य अड्डों पर भारी बमबारी की है।
क्षेत्रीय स्थिति और तेल की कीमतें
युद्ध के दूसरे हफ्ते में प्रवेश करते ही वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका साया दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतें 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गई हैं। ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष अब एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता जा रहा है।
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