नई दिल्ली ।
भारत में डिब्बाबंद और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों (Packaged Foods) पर चेतावनी लेबल लगाने का मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की चौखट पर है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) द्वारा प्रस्तावित फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FOPNL) व्यवस्था पर याचिकाकर्ताओं और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष विचाराधीन है, जिस पर अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 10 सितंबर 2026 को होनी है।
क्या है FSSAI का प्रस्तावित लाल षट्भुज (Red Hexagon) मॉडल?
सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद FSSAI ने एक हलफनामा दायर कर पैकेज्ड फूड के पैकेट के सामने हिस्से पर लाल रंग का षट्भुज (Red Hexagonal Warning Symbol) लगाने का प्रस्ताव दिया है।
इस व्यवस्था का मूल उद्देश्य उपभोक्ताओं को पैकेट के पीछे की सूक्ष्म पोषण तालिका पढ़े बिना यह बताना है कि उत्पाद में चिंताजनक पोषक तत्व (Sugar, Salt, Saturated Fat) अधिक मात्रा में हैं। ICMR-NIN की 2024 गाइडलाइंस के आधार पर:
- HIGH SUGAR (अत्यधिक चीनी)
- HIGH SALT (अत्यधिक नमक)
- HIGH FAT (अत्यधिक फैट)
- HIGHLY SWEETENED BEVERAGE (अत्यधिक मीठे पेय पदार्थ)
विवाद की मुख्य वजह: चरणबद्ध योजना और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां
FSSAI ने इस नियम को दो चरणों में लागू करने का प्रस्ताव रखा है, जिसे लेकर याचिकाकर्ता संस्था ‘3S And Our Health Society’ और जनस्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तीखी आपत्ति जताई है:
- चरण 1 (Phase I): चेतावनी लेबल केवल उन्हीं उत्पादों पर अनिवार्य होगा जिनमें निर्धारित सीमा से कम से कम दो या दो से अधिक पोषक तत्व (जैसे चीनी + फैट) अधिक हों।
- चरण 2 (Phase II): केवल एक पोषक तत्व की सीमा पार करने वाले उत्पादों को वार्निंग लेबल के दायरे में लाया जाएगा।
याचिकाकर्ताओं के मुख्य तर्क:
- एकल पोषक तत्व की अनदेखी: यदि किसी कोल्ड ड्रिंक या जूस में सिर्फ चीनी की मात्रा जानलेवा हद तक अधिक है, तो पहले चरण में उस पर कोई रेड वार्निंग नहीं होगी। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि अत्यधिक चीनी वाला प्रोडक्ट सिर्फ इसलिए सुरक्षित नहीं हो जाता क्योंकि उसमें नमक या फैट कम है।
- समयसीमा का अभाव: FSSAI ने दूसरे चरण (Phase II) को लागू करने की कोई स्पष्ट या बाध्यकारी समयसीमा (Timeline) तय नहीं की है।
- फॉन्ट और भाषा की समस्या: FSSAI ने चेतावनी का फॉन्ट साइज पीछे दी गई पोषण तालिका से केवल 1-पॉइंट बड़ा रखने का सुझाव दिया है, जो बेहद छोटा है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि चेतावनी बड़े आकार में, स्पष्ट और हिंदी व अंग्रेजी (द्विभाषी) दोनों में दर्ज हो।
सुप्रीम कोर्ट का रुख: स्वास्थ्य का अधिकार और खाद्य उद्योग का दबाव
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI के ढुलमुल रवैये पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा था कि “यदि आप इसे लागू नहीं कर सकते, तो हम आदेश जारी करेंगे।”
- अनुच्छेद 21 (Right to Health): अदालत ने स्पष्ट किया कि संविधान का अनुच्छेद 21 नागरिकों को स्वास्थ्य का अधिकार देता है। बच्चों में बढ़ते मोटापे और डायबिटीज को रोकने के लिए उपभोक्ताओं को त्वरित जानकारी पाने का अधिकार है।
- उद्योग के तर्क को खारिज किया: केंद्र सरकार द्वारा पारंपरिक खाद्य पदार्थों और उद्योग पर पड़ने वाले असर की दलील को कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि भारत को विकसित देशों के स्वास्थ्य मानकों से पीछे नहीं रखा जा सकता।
10 सितंबर 2026 की सुनवाई में किन सवालों का मिलेगा जवाब?
- सिंगल न्यूट्रिएंट ट्रिगर: क्या कोर्ट पहले चरण से ही केवल 1 पोषक तत्व की अधिकता पर चेतावनी अनिवार्य करेगा?
- फॉन्ट और विजिबिलिटी: क्या वार्निंग लेबल का आकार और बढ़ा कर उसे द्विभाषी किया जाएगा?
- समयसीमा (Deadlines): क्या FSSAI को दोनों चरणों को लागू करने की सख्त अंतिम तिथि दी जाएगी?
- छूट की श्रेणियां: एकल-सामग्री वाले उत्पादों (जैसे शुद्ध घी, तेल, शहद, चीनी) को दी जाने वाली छूट के मानक क्या होंगे?
उपभोक्ताओं और फूड इंडस्ट्री पर संभावित असर
- उपभोक्ताओं के लिए: खरीदारी के समय कुछ सेकंड में ही सेहतमंद और नुकसानदेह उत्पादों की पहचान हो सकेगी।
- खाद्य कंपनियों के लिए: कंपनियों को पैकेजिंग बदलनी होगी और रेड लेबल से बचने के लिए अपने उत्पादों में चीनी, नमक व वसा की मात्रा कम (Reformulation) करने पर मजबूर होना पड़ेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. FSSAI का लाल षट्भुज (Red Hexagon) वार्निंग लेबल क्या है?
Ans: यह पैकेज्ड फूड के सामने वाले हिस्से पर लगाया जाने वाला लाल रंग का चेतावनी प्रतीक है, जो उत्पाद में अत्यधिक चीनी, नमक या फैट होने की तुरंत जानकारी देता है।
Q2. FSSAI के प्रस्ताव पर मुख्य आपत्ति क्या है?
Ans: मुख्य आपत्ति यह है कि पहले चरण में यह चेतावनी केवल उन खाद्य पदार्थों पर लगेगी जिनमें कम से कम दो नुकसानदेह तत्व अधिक हों। केवल 1 अधिक तत्व (जैसे सिर्फ अत्यधिक चीनी) वाले उत्पाद पहले चरण में लाल चेतावनी से बच जाएंगे।
Q3. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई कब है?
Ans: मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 10 सितंबर 2026 को निर्धारित है।
Q4. किन खाद्य पदार्थों को इस वार्निंग लेबल से छूट देने का प्रस्ताव है?
Ans: प्राकृतिक या एकल-सामग्री वाले खाद्य पदार्थ जैसे शुद्ध घी, खाने का तेल, चीनी, गुड़, शहद और नमक को इस चेतावनी लेबल से छूट देने का प्रस्ताव है।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सुप्रीम कोर्ट में चल रही जनहित याचिका, FSSAI द्वारा दाखिल हलफनामे और सार्वजनिक कानूनी बहसों के विश्लेषण पर आधारित है। इसे किसी भी प्रकार की कानूनी सलाह या अंतिम नियामक आदेश न माना जाए। मामले का अंतिम स्वरूप सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अधीन होगा।

